प्रश्न-१. आयुष ग्राम (ट्रस्ट) चित्रकूट संस्था का सामान्य परिचय क्या है?

उत्तर- आयुष ग्राम (ट्रस्ट) एक पब्लिक ट्रस्ट है, भारत में स्वस्थ समाज की पुनस्र्थापना और भारतीय संस्कृति का पुनर्जागरण इसका प्रमुख उद्देश्य है। यह ट्रस्ट दान, चन्दा या सरकारी अनुदान से नहीं चलता। आयुष ग्राम ट्रस्ट चित्रकूट द्वारा पीड़ित लोगों को अनावश्यक ऑपरेशन से बचाव, सस्ते में चिकित्सा सेवा, नि:शुल्क संस्कारवती भारतीय शिक्षा, अत्यल्प मूल्य पर भोजन, गो सेवालय और साहित्य प्रकाशन का कार्य किया जा रहा है।

प्रश्न-२. आयुष ग्राम (ट्रस्ट) के चिकित्सालय में कौन-कौन से रोगों की किस प्रकार चिकित्सा की जाती है।

उत्तर- आयुष ग्राम (ट्रस्ट) चिकित्सालय चित्रकूट पूरी तरह से आयुष पद्धति का चिकित्सालय है जहाँ अंग्रेजी दवाओं का बिल्कुल भी प्रयोग नहीं होता। यहाँ डॉक्टरों की टीम, प्रशिक्षित फार्मेसिस्ट और नर्सेज सेवायें दे रहे हैं। पीड़ित लोगों को अनावश्यक ऑपरेशन से बचाना भी आयुष ग्राम का एक लक्ष्य है। हृदय  रोग, रीढ़ के रोग, कमर के रोग, मोटापा, गठिया, मधुमेह, रक्तचाप, चर्मरोग (सोरायसिस), बवासीर, बच्चों के दौरे, झटके गर्भाशय की बीमारी, किडनी फेल्योर, लिवर, पेट के रोग, पथरी, प्रोस्टेट, दमा, बच्चों के रोग, धातु विकार, थायराइड, नाक में मस्से बढ़ना, प्राथमिक स्तर का वैंâसर आदि रोगों का सफलतापूर्वक इलाज किया जा रहा है।

प्रश्न-३. पंचकर्म क्या है और क्या यहाँ पंचकर्म की सुविधा है।

उत्तर- शरीर में रोगों के मूल कारण दोषों को बाहर कर शरीर को स्वच्छ बनाने (डीटॉक्स करने) की प्रक्रिया का नाम पंचकर्म है। यह बहुत ही आरामदायक क्रिया है, जैसे- अभ्यंग (मालिश), स्नेहन, स्वेदन, शिरोधारा, उद्वर्तन, अनुवासन और निरूह वस्ति, उत्तर वस्ति, वमन, विरेचन आदि। उत्तर भारत में सबसे पहले इस ट्रस्ट की मातृ संस्था दिव्य चिकित्सा भवन, पनगरा (बाँदा) में ही पंचकर्म शुरू किया गया था। आयुष ग्राम ट्रस्ट में पंचकर्म की उत्तम सुविधा है, दरअसल आयुर्वेद का सही लाभ पंचकर्म से है अत: भारत के कोने-कोने से रोगी यहाँ पंचकर्म के लिए प्रतिदिन आते हैं और रहते हैं।

प्रश्न-४. बताया जाता है कि आयुष ग्राम (ट्रस्ट) चिकित्सालय चित्रकूट में अद्भुत प्राणरक्षक औषधियाँ हैं?

उत्तर- आपने सही सुना है। आयुष ग्राम (ट्रस्ट) चिकित्सालयों ऐसे-ऐसे रसौषधियों और कल्पों का संग्रह है जो मरते हुये व्यक्ति का भी प्राण रक्षण करते हैं, उनका जीवन बढ़ाते हैं।

प्रश्न-५. बताया जाता है कि यहाँ बच्चों के रोगों की उत्तम चिकित्सा है क्या सही है?

उत्तर- बिल्कुल सही, यहाँ बच्चों की इतनी उत्तम चिकित्सा है कि जो बच्चे बार-बार बीमार होते हैं, न्यूमोनिया, दौरा, झटका से पीड़ित हैं, बार-बार अस्पताल ले जाये जाते हैं, मानसिक शारीरिक रूप से अविकसित हैं, शिर में पानी भर जाता है, उनकी यहाँ पर बहुत अच्छी चिकित्सा है। इसलिए बीमार बच्चों को तो आयुष ग्राम ट्रस्ट चिकित्सालय, चित्रकूट में अवश्य एक बार लाना चाहिए। क्योंकि आयुष चिकित्सा का कोई साइड इफेक्ट नहीं है।

प्रश्न-६. यहाँ की फीस, रजिस्टे्रशन आदि विवरण क्या है?

उत्तर- आयुष ग्राम ट्रस्ट द्वारा सेवा कार्य किया जा रहा है, अत: रोगी का रजिस्ट्रेशन फीस मात्र १००/- रुपये है। यहाँ आगन्तुकों को भरपेट भोजन मात्र ५०/- रुपये में दिया जाता है और प्रथम श्रेणी के प्राइवेट वार्ड का चार्ज केवल ७५०/- और जनरल वार्ड का ५५०/- प्रतिदिन रहता है। जिसमें रोगी और उसके साथ वाले का भोजन शामिल है। यहाँ जो दवाइयाँ लिखी जाती हैं निर्धारित मूल्य पर मिलती हैं।

जिस दिन रोगी को दिखाना हो उस दिन प्रात: ८ बजे आकर पंजीकरण कराया जा सकता है। भीड़ और असुविधा से बचने के लिये प्रात: ९ बजे से सायं ५ बजे तक ०९९१९५२७६४६ या ८६०१२०९९९९ पर रजिस्टे्रशन कराया जा सकता है। फोन पर रजिस्ट्रेशन कराने का शुल्क रु.१५०/- है।

प्रश्न-७. पता चला है कि हृदय, गुर्दा, रीढ़ और कमर के रोगियों की यहाँ बिना ऑपरेशन चिकित्सा है।

उत्तर- रीढ़, कमर, गुर्दा और हृदय रोगियों की आयुष में तो इतनी उच्च चिकित्सा है कि रोगी ऑपरेशन से बच जाता है, रीढ़ का डिजेनरेशन खत्म होकर रीजेनरेशन होता है, ऐसे ही अनेकों गुर्दा के रोगी यहाँ की चिकित्सा से डायलेसिस से बचते हैं तथा हृदय रोगी बिना बाईपास सर्जरी और स्टेंट के पुनर्जीवन पा जाते हैं।

प्रश्न-८. चिकित्सालय का समय क्या है तथा यहाँ दिखाने का तरीका क्या है।

उत्तर- चिकित्सालय का समय सर्दियों में प्रात: ९ से १ और अपरान्ह २ से ५ तथा अन्य ऋतुओं में प्रात: ८ से १ और अपरान्ह २ से ५ बजे तक है। रोगी को रु.१००/- रुपये देकर पर्चा बनवाना होता है फिर सम्बन्धित रोग की ओ.पी.डी. में भेज दिया जाता है जहाँ सम्बन्धित रोग का डॉक्टर उसे देखता है। जिन रोगियों को भर्ती कर पंचकर्म की जरूरत होती है उन्हें भर्ती होने की सलाह दी जाती है। रोगियों और उनके सहयोगियों के लिये उचित भोजन की व्यवस्था संस्था भी में ही की गयी है।

प्रश्न-9. बाहर से आने वाले रोगियों के ठहरने की क्या व्यवस्था है?

उत्तर-स्थान उपलब्ध होने पर चिकित्सक को दिखाने के पूर्व रोगी एवं उनके परिचारक के ठहरने की व्यवस्था नि:शुल्क है। स्थान उपलब्ध न होने पर रोगी एवं उसके परिजन स्थानीय होटल, विश्राम गृह या धर्मशाला में ठहरते हैं।