चिकित्‍सा पल्‍लव

आयुष ग्राम ट्रस्ट चित्रकूटधाम से साहित्य प्रकाशन

 

दिव्य चिकित्सा भवन, पनगरा (बाँदा) से प्रकाशित हो रहे सभी प्रकाशन का विलय आयुष ग्राम ट्रस्ट चित्रकूट किया जा रहा है। दिव्य चिकित्सा भवन, पनगरा (बाँदा) में वर्ष १९९९ (१८ वर्षों) से लगातार प्रकाशित आयुष जगत की सर्वाधिक प्रसार संख्या वाली पत्रिका ‘चिकित्सा पल्लव’ का प्रकाशन अब चित्रकूटधाम आयुष ग्राम ट्रस्ट परिसर से हो रहा है।

चिकित्सा पल्लव के हर अंक में निम्नांकित सामग्री प्रकाशित होती है –

 

 

 

 

 

  • रोगी समस्या और समाधान।
  • रोग परिचय और चिकित्सा
  • घरेलू सफल और सहज उपचार
  • होम्योपैथी चिकित्सा प्राकृतिक उपचार
  • जड़ी बूटी के विषय में विशेष जानकारी
  • आयुर्वेद परिचय
  • आयुष पर सामयिक लेख
  • कैसे हुयी रोग मुक्ति
  • चिकित्सा कानून प्रश्नोत्तरी

“चिकित्‍सा पल्‍लव” मासिक अपने प्रारम्भिक काल से ही प्रतिवर्ष किसी न किसी विशेष रोग पर विशेषांक निकालता रहा है। वर्तमान में निम्‍नांकित विशेषांक पाठकों को बिक्री के लिए उपलब्‍ध हैं-

इसके अतिरिक्‍त विशेषांक सहित निम्‍नांकित वर्ष फाइलें भी बिक्री के लिए उपलब्‍ध हैं।
1. काम शक्ति विशेषांक २००२ इस विशेषांक के मुख्‍य आकर्षण निम्‍नांकित हैं- काम के सम्‍बन्‍ध में विभिन्‍न विदानों के विचार* काम, अर्थ लक्षण और महत्‍व * पुरुष के कामांग * स्‍त्री के कामांग वीर्य और शुक्रणु * बाजीकरण औषधियां कितने प्रकार की होती हैं * किन-किन पुरुषों को बाजीकरण औषधियों का सेवन करना चाहिए * बाजीकरण सेवन के क्‍या नियम हैं * औषधियों के अलावा और कौन-कौन सी वस्‍तुयें बाजीकरण हैं * कौन-कौन सी औषधि द्रव्‍यादि बाजीकरण हैं * नपुंसकता कारण और उपचार * नपुंसकता कई कारणों से उत्‍पन्‍न होती है जैसे नपुंसकता के प्रकार (भेद) * नपुंसकताका चिकित्‍सा सूत्र * मानसिक नपुंसकता * व्रद्धावस्‍था जन्‍य नपुंसकता * धातु क्षीणता जन्‍य नपुंसकता * मूत्र में फांस्‍फेट जाने वाले रोगियों की चिकित्‍सा का सफल अनुभाग * पित्‍तज नपुंसकता * वीर्य विकार जन्‍य यौन दुर्बलता * मधुमेहजन्‍य नपुंसकता * मधुमेहजन्‍य नपुंसकता में प्रक्रतिक चिकित्‍सा * उच्‍च रक्‍तचाप और नपुंसकता * मैथुन अभाव में धडकन का बढ जाना * निम्‍न रक्‍तचाप और नपुंसकता * कफरोग और नपुंसकता * अण्‍डकोष और निर्बलताजन्‍य नपुंसकता * अल्‍प शुक्राणुता की सफल चिकित्‍सा का अनुभव * नपुंसकता की यूनानी चिकित्‍सा * * नपुंसकता की होम्‍योपैथी चिकित्‍सा * नपुंसकता की प्राक्रतिक चिकित्‍सा * नपुंसकता की एलोपैथिक चिकित्‍सा * नपुंसकता की सफल चिकित्‍सा का अनुभव * शीघ्रपतन कारण एक विवेचन * शीघ्रपतन की चिकित्‍सा का सफल अनुभव * रतिसुख वद्र्धक उपाय * काम शक्ति वद्र्धक व्‍यंजन * यौन शक्ति बढाने वाली योग मुद्रायें * कामशक्ति वर्धक अनुभव प्रयोग * कामशक्ति वर्धक कामचूडामणि रस* शुक्र संजीवन रस * कामशक्ति वर्धक फलावलेह * व्रहत्र बानरी मोदक * बाजीकरण औषधि वानरी वटी * मकरध्‍वज रसायन * मदन मंजरी वटी * कामशक्ति वर्धक पुष्‍पधन्‍वा रस * कामशक्ति वर्धक छुहारा पाक * जीवन सुधा रसायन * कामशक्ति वर्धक आयुर्वेदिक पेटेण्‍ट योग * कामशक्ति वर्धक आयुर्वेदिक पेटेण्‍ट इंजेक्‍शन।


2. सम्‍पूर्ण आरोग्‍य विशेषांक २००७ इस विशेषांक के मुख्‍य आकर्षण निम्‍नवत् हैं- * आयुर्वेद सम्‍पूर्ण आरोग्‍य एक आवश्‍यकता * आरोग्‍य के लिए केवल आदर नहीं, परमादर करें * सम्‍पूर्ण आरोग्‍य दर्शन * मानसिक आरोग्‍य एक आवश्‍यकता * आरोग्‍य और रोग के दो ठिकाने * हम रोगी क्‍यों होते हैं * शारीरिक आरोग्‍यता एक चिन्‍तन * आओ अपने शरीर को समझें * आरोग्‍य की पहली सीढी दोष संतुलन * आरोग्‍य के लिए अपनी प्राकृति को समझें * बनाते और बिगाडते हैं ये तीन दोष * रोग बनने के पूर्व दोषों के स्‍टेशन * दोष संतुलन में स्‍मरणीय ३० गुण * दोषों को संतुलित कैसे रखें * आरोग्‍य में हेतु आहार की भूमिका * आहार संतुलन और आरोग्‍यता * आहार और उसके तत्‍व * आरोग्‍य में घोर बाधक १३ वेग * दवा में नहीं शरीर में ही पैदा करे क्षमता आरोग्‍यता की * रोग प्रतिरोधक क्षमतावान् और क्षमतारहित व्‍यक्ति * ॠतु अनुसार हरीतकी प्रयोग से सन्‍तुलित रहते हैं तीन दोष * मधुमेह जन्‍य नाडी शूल पर एक अद्भुत प्रयोग।


3. आयुष में आशुकारी चिकित्‍सा अनुभव विशेषांक २०१२ इस विशेषांक के मुख्‍य आकर्षण निम्‍नवत् हैं- * आयुर्वेद में तत्‍कालिक चिकित्‍सा * हार्पिज जोस्‍टर में चिकित्‍सा का चमत्‍कार * सीखने वाले के लिए समस्‍त संसार ही उसका गुरु है * परिस्थितियों ने किया विलम्‍ब * विभिन्‍न सामान्‍य रोगों की आशुकारी चिकित्‍सा * इमरजेन्‍सी में सहज सुलभ व सस्‍ती औषधियों को हल्‍केसे न लें * आशुफलप्रद आत्‍यायिक चिकित्‍सा * नशा नहीं दवा भी है अहिफेन * विषौधियों की कार्मुकता * सर्पदंश की असलियत और उसका आत्‍यायिक उपचार * रक्‍तप्रदर की तात्‍कालिक आयुर्वेद चिकित्‍सा * आयुर्वेद की तीव्र असरकारी औषधियां * बिना ऑपरेशन ठीक हुयी जुडी उंगली * गौरवशाली आयुर्वेद * काष्‍ठौषधियों की आशुकारी कार्मयुकता तथा प्रयोग * आकस्मिक चिकित्‍सा * जलौकावचारण द्वारा एक बालक की प्राणरक्षा * तमक श्‍वास की अनुभूत आत्‍यायिक चिकित्‍सा * कुछ आपातकालीन रोगों का आयुर्वेदिक उपचार * आकस्मिक चिकित्‍सा और होम्‍योपैथी * कुत्‍ता काटने का इलाज * असाध्‍य नहीं है थैलीसीमिया * आत्‍यायिक चिकित्‍सा के अनुभव * कैंसर रोग परिचय एवं जटिल रोग चिकित्‍सा * नव आयुर्वेद स्‍नातकों के लिए सुझाव * हिचकी से आकस्मिक उपचार * अतिसार नाशक अचूक प्रयोग * गौरवशाली आयुर्वेद।


4. आयुष में आशुकारी चिकित्‍सा अनुभव विशेषांक २०१३ इस विशेषांक के मुख्‍य आकर्षण निम्‍नांकित हैं- * ज्‍वर और उसके आशुकारी चिकित्‍सा * मासिक श्‍वास रोग पर चिकित्‍सानुभव * आकस्मिक चिकित्‍सा के कुछ प्रयोग * चोट के लिए आयुर्वेदिक औषधियों के चमत्‍कारी परिणाम * ६ घण्‍टे में हार्पीज जोस्‍टर के दर्द में लाभ * हिक्‍का रोग चिकित्‍सा * विभिन्‍न रोगों में आशुफलदायी चिकित्‍सा * हैजा लक्षण और उपचार * घाव के क्रमियों का आयुर्वेद से सफल उपचार * शिराशूल की त्‍वरित एवं अव्‍यर्थ चिकित्‍सा।


5. मधुमेह विशेषांक २०१४ इस विशेषांक के मुख्‍य आकर्षण निम्‍नांकित हैं- * त्रिदोष विज्ञान के दर्पण में मधुमेह * चरक संहिता में मधुमेह * मधुमेह की व्‍याख्‍या एवं उपचार * मधुमेह की एक अवस्‍था प्रमेह पीडिका * मधुमेह यानी डाइबिटीज मेलिट्स * मधुमेह के निवारण हेतु चिकित्‍सा सूत्र * मधुमेह के लक्षण एवं उपद्रव * अपने बच्‍चे को बाल आयुष रसायन सेवन करायें और देखें चमत्‍कार * मधुमेह कारण और निवारण * बच्‍चे भी नहीं बच रहे डायबिटीज से * महिलायें और मधुमेह * मधुमेह जन्‍य दुष्‍परिणाम और रोग के उपद्रव * मधुमेह के उपद्रव * मधुमेह की चिकित्‍सा * मधुमेह में चिकित्‍सा सिद्धान्‍त * मधुमेह चिकित्‍सा में प्रयुक्‍त होने वाल शास्‍त्रीय योग * मधुमेह की उपद्रवों की चिकित्‍सा * मधुमेह की चिकित्‍सा के लिए अनुभूत प्रयोग * मधुमेह * मधुमेह व उसके उपद्रव स्‍वरुप उत्‍पन्‍न रोगों में अनुभूत प्रयोग * मधुमेह रोगी के लिए भोजन व्‍यवस्‍था * मधुमेह में पथ्‍य एवं आयुर्वेदिक चिकित्‍सा * मधुमेह और यौन समस्‍यायें * मधुमेह से बचायें पंचांग योग साधना * जियाबेतिस यानी डायबिटीज * मधुमेह का होम्‍योपैथी उपचार।


6. वर्ष २०१5 में चिकित्सा पल्लव पत्रिका द्वारा ‘मानस रोग विशेषांक प्रकाशित किया गया है। यह विशेषांक मधुमेह से कैसे हो बचाव? मधुमेह की चिकित्सा पर आधारित है। मधुमेह में कैसा हो खान-पान? कैसा हो रहन-सहन? इस पर पर्याप्त जानकारी प्रदान करता हैं। यह विशेषांक सभी के पढ़ने योग्य है। इस विशेषांक के मुख्‍य आकर्षण निम्‍नांकित हैं- * मनोरोग कारण और चिकित्‍सा * मानसिक रोग एक अवलोकन * मन, मनोरोग एवं त्रिगुण का सम्‍बन्‍ध * मानस रोगों का कारण और निवारण * एक मनोरोग पैनिक अटैक की आयुर्वेद से सफल, स्‍थायी और सस्‍ती चिकित्‍सानुभव * मानस रोगों के सन्‍दर्भ में मनोविज्ञान की उपादेयता * मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य में सुखद वातावरण का महत्‍व * मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य के लिए आवश्‍यक है आचार रसायन * मानसिक रोग एवं उपचार * मानसिक रोगों में पंचकर्म का महत्‍व * तेजी से जड जमाता मानसिक रोग उन्‍माद * मानसिक रोगों में प्रमुख उन्‍माद * आयुर्वेद द्वारा मनोवसादता (डिप्रेशन) से उबरना बहुत सरल है * युवती ने दो ब्‍यूटीपार्लर खोल लिये * विवाह से घबराया युवक * दूर हुआ पूजा का डिप्रेशन * भुतोन्‍माद अथवा ग्रहोन्‍माद * तनाव एवं अनिद्रा की मात्रा वस्ति चिकित्‍सा * तनाव से बचाव आयुर्वेद से * तनाव है तो नो टेंशन होम्‍योपैथी में है इलाज * अनिद्रा एवं होम्‍योपैथी औषधियां * मानस रोग एवं उनका व्‍यवहारायुर्वेदीय विवेचन * आयुर्वेद में मनोरोग की उत्‍तम चिकित्‍सा यह मैंने बचपन में देखा * अवसाद (डिप्रेशन) * मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य में यौगिक आहार की उपादेयता * जैसा भोजन वैसा मन और स्‍वास्‍थ्‍य * मानसिक रोग स्‍फुरणाएं विचार ही नहीं * ओबसेसिव कम्‍पलसिव डिसऑर्डर (ओ.सी.डी.) के सन्‍दर्भ में आयुर्वेदीय दृष्टिकोण * बुद्धिवर्धक बच्‍चों की कार्मुकता * अपस्‍मार एवं इसका आयुर्वेद उपचार * आपस्‍मार में व्रत चिकित्‍सा * मानसिक दौर्बल्‍य जन्‍य वात पित्‍तज अपस्‍मार (मिरगी) से ग्रस्‍त एक छात्र की सफल चिकित्‍सानुभव * विखंडित मनस्‍कता पर सफल अनुभव * सम्‍पूर्ण शरीर में कीडे रेंगने की अनुभूति वाले मानसिक रोगी का सफल चिकित्‍सानुभव * डाउन सिड्रोम एक बीज दोषक मानसिक विकार * मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य में गीता * मानसिक रोग का स्‍थायी उपचार आदि


7. स्‍त्री रोग विशेषांक २०१६ इस विशेषांक के मुख्‍य आकर्षण निम्‍नांकित हैं- * विशेष सम्‍पादक की कलम से आयुर्वेद है सम्‍पूर्ण जरुरत उसके उपयोगकर्त्‍ता की * आयुर्वेद साहित्‍य और स्‍त्री का महत्‍व * हार्मोनल रुप से अस्‍वस्‍थ और स्‍त्री रोगों से पीडित महिला की चिकित्‍सा * बीस प्रकार के योनि रोग और उससे होने वाली परेशानियां तथा सामान्‍य चिकित्‍सा * बढता रोग योनिभ्रंश और उसकी सफल चिकित्‍सा * प्रदर का नाश करती है संजीवनी वटी * श्‍वेत प्रदर करण एवं निवारण * कैसे हुयी रोगमुक्ति- नया जीवन मिला किडनी स्‍वस्‍थ्‍ा हुयी * कुछ सरल और महत्‍वपूर्ण योग प्रदर रोगी चिकित्‍सा में कुछ महत्‍वपूर्ण योग * श्‍वेत प्रदर एक सामान्‍य स्‍त्री रोग * वसंत पंचमी से बच्‍चों के लिए आयुष ग्राम ट्रस्‍ट के चिकित्‍सालय में शिशु वार्ड * स्‍त्री की योनि से गर्भाशय तक के विशेष रोग और चिकित्‍सा * गोघृत का पान किनके लिए उपयुक्‍त * योनिप्रक्षालन के द्वारा योनिस्राव की चमत्‍कारी चिकित्‍सा * क्‍योंकि मैं आयुर्वेद चिकित्‍सक हूं और आयुर्वेद को मानता हूँ। * बांझपन में आयुर्वेद कर रहा चमत्‍कार * बांझपन नाशक एक सस्‍ता, सरल, अनुभूत प्रयोग * अज्ञात कारणजन्‍य बांझपन में एक सफल चिकित्‍सानुभव * आयुर्वेद से गर्भिणी की परिचर्या * गर्भिणी का मासानुमासिक पथ्‍य * गर्भावस्‍था में इनसे बचें * स्त्रियों के लिए महान् उपयोगी कल्‍प फलकल्‍याण घृत * कैसे हुयी रोगमुक्ति ऐसी सफलता मिलती है आयुर्वेद से * सूतिका रोग की चिकित्‍सा में कुछ महत्‍वपूर्ण योग * कृत्रिम गर्भाधान या शुक्रसेचन * आयुर्वेदिक नर्स एवं फार्मेसिस्‍ट बनने का सुअवसर * गर्भपात एवं चिकित्‍सा का वैधानिक पक्ष * सच में/आयुर्वेद ने दिया पुन‍र्जीवन * बार-बार हो रहे गर्भस्राव से ग्रस्‍त एक महिला की सफल चिकित्‍सानुभवन * आयुर्वेद के ग्रन्‍थों में स्‍त्री रोगों की चिकित्‍सा हेतु कुछ योग * नपुंसकता नाशक एक सरल प्रयोग * स्‍त्री सौन्‍दर्य में गुणकारी लेप * कैसे बरकरार रखें युवतियां अपने सौंदर्य को * स्‍त्री रोगों में कार्यकारी द्रव्‍य और सिद्धान्‍त * चिकित्‍सा पल्‍लव के आजीवन या वार्षिक सदस्‍य बनायें पायें शील्‍ड * लेख आमंत्रण * महिलाओं में रक्‍ताल्‍पता कारण और निवारण * आधुनिक युग में स्‍त्री रोगों में प्रयोग करने योग्‍य कतिपय सरल एवं आशुकारीयोग * नारी का दुश्‍मन स्‍तन कैंसर * स्‍तन अर्बुद की होम्‍योपैथी चिकित्‍सा * बच्‍चों के विकास आयुर्वेद के साथ ‘बाल आयुष रसायन’ कार्यक्रम अपनायें * बाल आयुष रसायन लाडले लें कर रहा चमत्‍कार * दिल के रोग को दीजिए मात… कीजिए सेहत से मुलाकार * मैथुन के समय महिलाओं में कष्‍ट कारण और निवारण * स्‍त्री रोगों में पंचकर्म चिकित्‍सा की महती उपयोगिता * आयुष चिकित्‍सक चिकित्‍सालय का रजिस्‍ट्रेशन आयुष अधिकारियों के यहां ही करायें * गर्भावस्‍था में आहार विवेक * गर्भोपघातकर भाव * गो रक्षा-एवं गो-सेवा गोवंश की रक्षा पर विचार * धन्‍वन्‍तरि परिवार का आमंत्रण आपको * राष्‍ट्रीय कायचिकित्‍सा पर व्‍याख्‍यान एवं प्रशिक्षण * विरेचन द्वारा अल्‍पशुक्राणुता की सफल चिकित्‍सा एक अनुभव * स्‍त्री रोगों में मर्म चिकित्‍सा।


अब तक प्रकाशित एवं उपलब्‍ध पुस्‍तकें

डॉक्टर कानून

जिसे देश के १० हजार से अधिक डॉक्टरों ने अपनाया, इस ग्रन्थ में निम्नांकित विशिष्ट सामग्री प्रकाशित हैं :
1. १. भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद् अधिनियम १९५६– इसमें एलोपैथिक चिकित्‍सा के नियम, विधान और उपाधियों का उल्‍लेख है। २. भारतीय चिकित्‍सा केन्‍द्रीय परिषद् अधिनियम १९७०- इस एक्‍ट में आयुर्वेदिक, यूनानी, सिद्ध चिकित्‍सकों के नियम, विधान और उपाधियों का वर्णन है। ३. केन्‍द्रीय होम्‍योपैथिक परिषद् अधिनियम १९७३- इस एक्‍ट में होम्‍योपैथी चिकित्‍सक बनने की अर्हतायें, नियम, विधान और उपाधियों का वर्णन है। ४. भारतीय चिकित्‍सा उपाधि अधिनियम १९१६- इस एक्‍ट में मेडिकल डिग्रीज एक्‍ट की सम्‍पूर्ण जानकारी है। ५. गर्भ समापन- इस एक्‍ट में चिकित्‍सीय गर्भसमापन (एम.टी.पी.) एक्‍ट १९७१ की सम्‍पूर्ण जानकारी वर्णित है। गर्भपात के नियम, लाइसेन्‍स और प्रक्रिया की सम्‍पूर्ण जानकारी वर्णित है। इसके अतिरिक्‍त मानव अंग प्रत्‍यारोपण और पी.एन.डी.टी. एक्‍ट का सम्‍पूर्ण वर्णन किया गया है। ६. इस ग्रन्‍थ का छठवां भाग महत्‍वपूर्ण है। क्‍योंकि इसमें हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के महत्‍वपूर्ण फैसले तथा विधि के सिद्धान्‍त प्रकाशित हैं। जैसे सभी प्रदेशों के विश्‍वविद्दालय के बीएएमएस बराबर और चिकित्‍साधिकारी होने के पात्र होम्‍योपैथी डॉक्‍टर द्वारा एलोपैथ से चिकित्‍सा कार्य करने पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय।

• आयुर्वेदिक, यूनानी मेडिकल स्‍टोर के लिए किसी भी लाइसेन्‍स की जरुरत नहीं।
• आयुर्वेदिक डॉक्‍टर एलोपैथिक कर सकते हैं बशर्ते……….सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक जजमेण्‍ट।
• अनाधिक्रत चिकित्‍सा व्‍यवसायियों पर प्रतिबन्‍ध। * सभी शासनादेश शून्‍य आयुर्वेद-यूनानी चिकित्‍सकों की एलोपैथिक प्रैक्टिस की स्थिति * हर चिकित्‍सक को कराना होगा सीएमओ के यहां रजिस्‍ट्रेशन हाई कोर्ट। * ि‍फजियोथैरापिस्‍ट को एलोपैथिक प्रैक्टिस के अधिकार पर पटना उच्‍च न्‍यायालय का निर्णय। * दूसरे प्रान्‍त से रजिस्‍टर्ड चिकित्‍सकों की उत्‍तर प्रदेश में प्रैक्टिस करने के अधिकार की स्थिति। * छोटी सी भूल पर डॉक्‍टरों पर नहीं चलेगा मुकदमा- सुप्रीम कोर्ट। * २००३ के पूर्व छात्रों के प्रवेश हेतु सीसीआईएम की अनुमती आवश्‍यक नहीं- कर्नाटक हाई कोर्ट। * बीएमएएस, बीयूएमएस डॉक्‍टरों की केरल में एलोपेथिक दवा प्रयोग की स्थिति। * वैध विशारद/आयुर्वेद रत्‍न के रजिस्‍टर्ड और प्रैक्टिस की कानूनी स्थिति। * जीएएमएस (बिहार) उपाधि पूरी तरह से मान्‍य। * आयुर्वेदिक एलोपैथिक दवा का मिक्‍चर कर बेचना अपराध- सुप्रीम कोर्ट। * डॉक्‍टरपर मानव वध का मुकदमा उचित नहीं- सुप्रीम कोर्ट। * पूरी सावधानी के बावजूद चिकित्‍सा फेल हो जाने डॉक्‍टर की असावधानी नहीं- सुप्रीम कोर्ट। * केन्‍द्रीय कानून के विरुद्धबनाया

रुपये ४५०.००/- डाकखर्च अतिरिक्‍त

गया राज्‍य का कानून असंवैधानिक। * किसी डॉक्‍टर को गिरफ्तार न करें- सुप्रीम कोर्ट। * आयुष डॉक्‍टरों द्वारा एलोपैथिक दवा प्रयोग की स्थिति- मद्रास हाईकोर्ट। * सोनोग्राफी करनेके कौन डॉक्‍टर हैं पात्र- हाईकोर्ट। * प्राक्रतिक एवं योग चिकित्‍सा पैथीमान्‍य औमूर महत्‍वपूर्ण इसे सरकार विनियम करें प्राक्रतिक चिकित्‍सा पर महत्‍वपूर्ण एकदम नया जजमेण्‍ट।

2. जटिल रोगों की सरल चिकित्‍सा – डॉ. मदनगोपाल वाजपेयी
डॉ. मदनगोपाल वाजपेयी द्वारा लिखित यह पुस्‍तक आयुर्वेद में जटिल रोगों की सरल चिकित्‍सा आयुष ग्राम प्रकाशन चित्रकूटधाम द्वारा २०१५ में प्रकाशित की गयी थी। परन्‍तु आयुष चिकित्‍सकों के मध्‍य बढती मांग के कारण २०१५ में ही इसकापुनर्व्रकाशन करना पडा इस पुस्‍तक में है- *ज्‍वर *मानस ज्‍वर * वायरल फीवर * तक्रकल्‍प * उदररोग * अल्‍सरेटिव * कोलाइटिस * कठिन शिरशूल * क्रोनिक मेनिजाइटिस * अनन्‍तवातशूल * गायनकोमेस्टिरिया * इश्‍चेमिक हार्ट * हाई ब्‍लडप्रेशर * मधुमेह और इन्‍सुलिन से मुक्ति * किडनी फेल्‍योर * सर्वाइकल स्‍पॅण्डिलाइटिस *ग्रधसी * बार-बार होने वाले फ्रैक्‍चरक * कम्‍पवात * श्‍वासदमा * राजयक्ष्‍मा टीबी * खर्राटा आना * मिरगी * हिस्‍टीरिया * सिकलिंग * पुरानाघाव आदि की प्रामाणिक और व्‍यावहारिक आयुर्वेद चिकित्‍सा का वर्णन है। यह पुस्‍तक आयुर्वेद के छात्रों, चिकित्‍सकों तथा आयुर्वेद प्रेमी के लिए उपयोगी है।

मूल्‍य रुपये २००/-


3. ऐसे होते चमत्‍कार आयुर्वेद से – डॉ. मदनगोपाल वाजपेयी

इस पुस्‍तक में सामान्‍य रोगोंसे लेकर गंभीर रोगों जैसे गुर्दा फेल्‍योर, मूत्र क्रच्‍छ्रता, मस्तिष्‍क रोग, रीढ के विकार, हृदय रोग और झटकों और दौरों तक की कारण और निवारण सहित चामत्‍कारिक चिकित्‍सा वर्णित है। इस छोटी सी पुस्‍तक में गागर में सागर की कहावत सिद्ध है। पुस्‍तक स्‍वयं पढने योग्‍य तथा आयुर्वेद के प्रचार हेतु दूसरों को उपहार में दें।

मूल्‍य रुपये ४०/-


३. तम्‍बाकू से रोग निवारण – डॉ. मदनगोपाल वाजपेयी

तम्‍बाकू जहर के साथ-साथ एक इमरजेन्‍सी मेडिसिन भी है। इस आधार पर एक शोधपरक, ज्ञानवर्धक एवं बहुउपयोगी लघु पुस्तिका, जिसमें कई रोगों की इमरजेन्‍सी चिकित्‍सा उल्लिखित है।

मूल्‍य २५/-


४. असरदार सरल उपचार – डॉ. मदनगोपाल वाजपेयी

इस पुस्‍तक में पेट रोग, ज्‍वर, चर्मरोग, ग्रधसी, कम्‍पवात, बवासीर, पथरी, मिरगी, मधुमेह, शीपपित्‍त, श्‍वास, थायरायड, सफेद दाग आदि ६० रोगोंका सरल, किन्‍तु प्रभावकारी उपचार एवं पथ्‍यापथ्‍य प्रकाशित किये गये हैं।

मूल्‍य रुपये ५०/-


५. बेल से प्रभावकारी चिकित्‍सा – डॉ. मदनगोपाल वाजपेयी

इस पुस्‍तक में बेल के कायाकल्‍पकारी गुण, उदर रोगों के साथ विभिन्‍न रोगों में बेल की उपयोगिता, बेल के पत्‍तों, फूल, छाल और जड के द्वारा विभिन्‍न जटिल रोगों का सरल उपचार एवं अन्‍य शोधपरक उपचार प्रकाशित किये गये हैं।

मूल्‍य रुपये ३०/-


६. सम्‍पूर्ण आरोग्‍य दर्शन – डॉ. मदनगोपाल वाजपेयी

यह पुस्‍तक नुस्‍खों की नहीं। बल्कि स्‍वस्‍थ जीवन जीने का मार्ग बताने वाली एक वैज्ञानिक पुस्‍तक है। आपकी शारीरिक प्रक्रति क्‍या है। आपका अपनी प्रक्रति के अनुसार खान-पान, रहन-सहन कैसा रहे, जिससे आप रोगी न हों और यदि रोग हो गया है तो कैसे जल्‍द स्‍वस्‍थ हों जेसे विषय इस पुस्‍तक में शामिल किये गये हैं। इस पुस्‍तक को पढकर बोधगम्‍य ज्ञान प्राप्‍त कर लेने के बाद कोई भी व्‍यक्ति किसी को देखकर एक क्षण में उसके स्‍वभाव, आदत, प्रक्रति, चाल-ढाल और आचरण के विषय में एक दैवज्ञ की भांति जान सकता है। शरीर के रोगकारक दोषों को संतुलित करने, बढाने और घटाने वाले खान-पान, रहन-सहन का सम्‍पूर्ण विवरण इस पुस्‍तक में है। मानसिक और शारीरिक स्‍वास्‍थ्‍य की स्थिरता पर वैज्ञानिकतापूर्ण विवेचन इस पुस्‍तक में है। आयुर्वेद के स्‍वास्‍थ्‍य रहस्‍य को सूक्ष्‍मता तक आपको पहुँचाने के लिए इस किताब का प्रकाशन किया गया है।

मूल्‍य रुपये ६०/- ( डाकखर्च २५/- )


७. आयुर्वेद का वैज्ञानिक वैभव – डॉ. मदनगोपाल वाजपेयी

आयुष ग्राम ट्रस्‍ट चित्रकूट द्वारा जिस प्रकार का यह क्रान्तिकारी प्रकाशन किया गया है, शायद ही ऐसा प्रकाशन आज तक आयुष जगत में हुआ हो। इस पुस्‍तक में लेखक ने बडी विद्वता पूर्ण ढंग से आयुर्वेद के प्रमाण देकर उन विषयों पर गहरी चोट की है जिनको अमेरिका या इंग्‍लैण्‍ड बडी सफाई से यह कह देते थे कि यह खोज हमारी है। लेखक ने वैज्ञानिक ढंग से आयुर्वेद के सिद्धान्‍तों की सर्वोत्‍क्रष्‍टाता सिद्ध की है। इस पुस्‍तक को पढने के बाद एक ओर अपने देश के महान् चिकित्‍सा विज्ञान पर गर्व होता है तो दूसरी ओर हमारी आंख खुली की खुली रह जाती है कि भारत का चिकित्‍सा विज्ञान कितना सम्रद्ध है जिसे बडी चापलूसी से विदेशी चुरा रहे हैं। साथ ही अन्‍तरात्‍मा की यह आवाज निकलती है कि देश में ही नहीं विश्‍व में आयुर्वेद की व्रद्धि‍ होनी चाहिए,इसका विकास करने वाले राक्षसों, जो न आयुर्वेद जानते न एलोपैथ और स्‍वयं वर्णसंकर होकर वर्णसंकरी की बात करते हैं उन अज्ञानियों, मूर्खों का विनाश होना चाहिए ताकि आयुर्वेद खुली हवा में सॉस लेते हुए अपने उपासको, विद्वानों, समर्थकों के माध्‍यम से एलोपैथ से आगे बढ जाये और जन-जन की चिकित्‍सा बन जाये।
यह पुस्‍तक स्‍वयं पढें तथा इसकी कम से कम १-२ प्रति अन्‍य को उपहार में दें। यह पुस्‍तक अपने होनहार बच्‍चों को अवश्‍य पढने को दें ताकि उनमें अपनेदेश के विज्ञान के प्रति स्‍वाभिमान जाग्रत हो सके। यह पुस्‍तक चिकित्‍सकों, शोधकर्त्‍ताओं के लिए उपयोगी है।
नोट- हम आश्‍वस्‍त करते हैं कि पुस्‍तक मंगाकर पढें यदि पसन्‍द न आए तो बिना मैली किए वापस कर दें। हम यह भी विश्‍वास दिलाते हैं कि पुस्‍तक को पढने के बाद निश्चित रुप से आप इसे वितरित करने की सोचेंगे, जिससे भारत का अकूत ज्ञान-गौरव सर्वत्र पुहंचे।

मूल्‍य रुपये ५०/- चिकित्‍सा पल्‍लव के ग्राहकों को डाकखर्च की पूरी छूट।


८. प्राक्रतिक चिकित्‍सा दर्शन (शीघ्र प्रकाश्‍य)

प्राक्रतिक चिकित्‍सा की उपादेयता को जानकर ही अनेकों एम.बी.बी.एस. और एलोपैथ में एम.डी. डॉक्‍टर तक एलोपैथिक चिकित्‍सा को छोडकर प्राक्रतिक चिकित्‍सालय में चिकित्‍सा सेवा दे रहे हैं। यह अनुभव सिद्ध तथ्‍य है कि प्राक्रतिक चिकित्‍सा के सिद्धान्‍त, विधान, प्रयोग, और उसके चामत्‍कारिक परिणाम आयुर्वेद, यूनानी या एलोपैथिक चिकित्‍सक के आत्‍मविश्‍वास को बढाते हैं। इसलिए प्रत्‍येक आयुर्वेद, यूनानी तथा होम्‍योपैथी चिकित्‍सकों को प्राक्रतिक चिकित्‍सा का सैद्धान्तिक और प्रायोगिक ज्ञान करना ही चाहिए। इस ग्रन्‍थ में-
प्राक्रतिक चिकित्‍सा के सिद्धान्‍त • रोग के कारण कीटाणु • तीव्र रोग शत्रु नहीं मित्र होते हैं • प्रक्रति स्‍वयं चिकित्‍सक है • प्राक्रतिक चिकित्‍सा में उभार • उपवास और उसके प्रकार • पूर्णोपवास का शरीर पर प्रभाव • उपवास काल के उपद्रव और उसका शमन • मालिश के नियम विधान और लाभ • अग्नितत्‍व चिकित्‍सा • जलतत्‍व चिकित्‍सा • प्रथ्‍वी तत्‍व चिकित्‍सा • भोजन और आहार से चिकित्‍सा • संक्षिप्‍त शरीर रचना और क्रिया • सिरदर्द • नजला-जुकाम • साइनोटाइटिस • नकसीर फूटना •कब्‍ज • बवासीर • मधुमेह • मोटापा • मानसिक रोग आदि अनेक रोगों की चिकित्‍सा का वि‍स्‍तृत विवरण है।
इस पुस्‍तक को पढें साथ ही अपने घर-परिवार में भी पढने को दें। इससे निश्चित रुप से परिवार में स्‍वस्‍थ वातावरण बनेगा। पुस्‍तक पढने के पश्‍चात अनोखी संतुष्टि मिलेगी।

मूल्‍य रुपये ४००/-


रोगों की समूल चिकित्‍सा (शीघ्र प्रकाश्‍य)

आयुष ग्राम ट्रस्‍ट द्वारा रोगों की समूल चिकित्‍सा का प्रकाशन इस उद्देश्‍य से किया गया है कि प्रत्‍येक व्‍यक्ति किसी भी रोग से ग्रस्‍त होने पर उसका मूल निवारण की विधि समझ सके। पुस्‍तक एकदम सरल भाषा में है ताकि हर व्‍यक्ति, आयुर्वेद का छात्र और सामान्‍य पढा लिखा व्‍यक्ति भी विषय को समझ सके।

मूल्‍य रुपये ६०/- डाकखर्च रुपये २५/-


उपरोक्‍त समस्‍त पत्रिकाओं एवं पुस्‍तकें प्राप्‍त करने हेतु लिखें या फोन द्वारा सम्‍पर्क करें

संपर्क करें – ०९९१९५२७६४६ / 05198 – 233 335 / 36 / 38

पता – आयुष ग्राम ट्रस्‍ट, सूरजकुण्‍ड रोड, (पुरवा तरौंहा मार्ग), चित्रकूट (उ.प्र.) २१०२०५

आयुष ग्राम ‘मासिक

जब हमारे देश में आयुर्वेद का घर-घर और जन-जन में आयुर्वेद का प्रचार था तब भारत समृद्ध था। मानव सबल स्‍वास्‍थ, निरोग और घातक रोगों से मुक्‍त और सदाचारी था क्‍योंकि आयुर्वेद वह वैदिक परम्‍परा है जो केवलस्‍वस्‍थ ही नहीं बल्कि सदाचारी भी बनाता है। धीरे-धीरे आयुर्वेद का हृास हुआ, परिणामस्‍वरुप आयुर्वेद के वास्‍तविक जानकार वैद्दों का अभावा होता गया और भारत तथा भारतीयों में हर प्रकार की गिरावट आयी। देश में आयुर्वेद संस्‍कृति का पुन प्रसार हो और आयुष पद्धति का पुनरुत्‍थान हो, इस उद्देश्‍य से आयुष ग्राम ट्रस्‍ट अपने प्रकाशन प्रकल्‍प से आयुष ग्राम ‘मासिक’ का प्रकाशन गत दो वर्षों से कर रहा है। आपसे अनुरोध है कि इस मासिक पत्र को अपने हृदय में स्‍थान और सम्‍मान दें। इसे स्‍वयं पढे तथा अन्‍यको भी पढायें। साथ ही सभी को आयुष ग्राम ट्रस्‍ट की सेवायें लेने के लिए प्रेरित करें जिससे आयुष ग्राम ट्रस्‍ट का मिशन ‘निरोग भारत का निर्माण’सफल हो।

इस मासिक का सदस्‍य बनने हेतु रुपये २००/- (दो सौ मात्र) वार्षिक शुल्‍क के रुप में मनीऑर्डर/बैंक ड्रफ्ट/मल्‍टीसिटी चेक जो आयुष ग्राम ट्रस्‍ट के पक्ष में कर्वी, चित्रकूट में देय हो, भेज सकते हैं। इसके अतिरिक्‍त पंजाब नेशनल बैंक के खाता संख्‍या-६८४६००५५०००००१०३, आईएफसी कोड पीयूएनबी ०६८४६०० में जमाकर ई मेल ayushgramtrust@gmail.com या मोबाइल नम्‍बर- ०९९१९५२७६४६ पर सूचित कर सकते हैं।

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