आयुष कार्डियोलॉजी सर्विस

हार्ट सुरक्षा और हार्ट रोगियों का उपचार आयुर्वेद मे सर्वोत्तम है । भारत में प्राचीन काल से हार्ट रोगियों की उत्तम और सफल चिकित्सा की जाती रही है। आचार्य चरक, सुश्रुत, धन्वन्तरि के शोध परक साहित्य इसके प्रमाण हैं। अंग्रेजी अस्पतालों में हार्ट की चिकित्सा में स्टेंट (एंजियोप्लास्टी) या बाईपास सर्जरी अपनातें हैं पर कुछ दिनों बाद फिर ब्लॉकेज हो जाता है। या किडनी की बीमारी शुरू हो जाती है या दिमागी रोग पैदा हो जाते हैं। यह बात सोशल मीडिया में भी रहती है।

दिव्य चिकित्सा भवन में हार्ट के अनेकों रोगियों को ऑपरेशन से बचाने और निरोग करने की यात्रा शुरू कर आयुष ग्राम ट्रस्ट ने आयुष ग्राम चिकित्सालयम् में आयुष कार्डियोलॉजी की स्थापना की। हार्ट की सुरक्षा और हार्ट रोग का उत्कृष्ट उपचार आयुष में है इस ज्ञातव्य के आधार पर अब भारत सरकार ने भी ‘‘सेन्ट्रल आयुर्वेदिक हार्ट डिजीज रिसर्च इंस्टीट्यूट’’ की स्थापना को तबज्जो दी ।

हार्ट रोगी को यहाँ स्नेहन, स्वेदन, वमन, विरेचन दिया जाता है इसके पश्चात् औषधियाँ दी जाती हैं। आयुष चिकित्सा में हार्ट की इतनी प्रभावशाली चिकित्सा है कि स्टेंट डलवाकर, बाईपास कराये रोगी भी सुखी जीवन पाते हैं तथा हार्ट रोगी स्टेंट या बाईपास से बच जाते हैं।

जहाँ हार्ट रोग जीवन भर अंग्रेजी दवाइयां खाता है वहीं आयुष चिकित्सा में १२-१३ माह सभी दवायें बन्द कर दी जाती हैं। प्रतिमाह सैकड़ों हार्ट रोगी यहाँ से निरोग होते हैं। १५-१५ दिन की २ सिटिंग यहाँ देनी पड़ती है। आप स्वयं अनुभव करेंगे कि पहली सिटिंग के बाद ही कितनी स्पूâर्ति, ऊर्जा का अनुभव होता है। जब भी हार्ट के रोगी को अंग्रेजी डॉक्टर या अस्पताल ऑपरेशन या स्टेंट की सलाह दें तो आयुष चिकित्सा अपनायें। हमारा पूरा प्रयास होगा कि अन्य रोगियों की तरह आप भी स्टेंट या बाईपास सर्जरी से बचेगें।

इस स्टेज के हार्ट रोगियों को भी हम अहमियत देते हैं जब अंग्रेजी अस्पताल/डॉक्टर हार्ट रोगी को बाईपास या स्टेंट लायक भी न समझते हों । आयुष ग्राम ट्रस्ट चित्रकूट से लगातार स्वस्थ हो रहे और स्वस्थ हुए हार्ट रोगियों के विचार/अनुभव पढ़ने योग्य है। यहाँ तो आईसीयू से निकालकर हार्ट रोगी स्वस्थ किये जा रहे हैं। हार्ट रोगी को १५-१५ दिन की दो सिटिंग अनिवार्य है।