प्रख्यात आयुर्वेद मनीषी एवं भारतीय चिकित्सा परिषद् उ.प्र. शासन के पूर्व उपाध्यक्ष आचार्य डॉ. मदनगोपाल वाजपेयी ने लोक कल्याण की भावना को लेकर प्रभु श्रीराम की पावन साधन स्थली चित्रकूटधाम में आयुष ग्राम ट्रस्ट की स्थापना की है। इस ट्रस्ट द्वारा आयुष ग्राम चिकित्सालयम्’, आयुष ग्राम गोसेवालय, आयुष ग्राम गुरुकुलम्, आयुष ग्राम मासिक, आयुष ग्राम वनौषधि उद्यान, आयुष ग्राम प्रकाशन जैसे प्रकल्प संचालित किये जा रहे हैं। ‘दिव्य चिकित्सा भवन’ इस ट्रस्ट की मातृ संस्था है। यह ट्रस्ट सम्पूर्ण कार्य नॉन प्रॉफिट के आधार पर कर रहा है तथा इस ट्रस्ट को किसी भी प्रकार की कहीं से आर्थिक सहायता या अनुदान प्राप्त नहीं है।

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चित्रकूटधाम के सूरजकुण्‍ड रोड (पुरवा तरौंहा मार्ग) पर झपोला पहाड़ियों के मध्य आयुष ग्राम (ट्रस्ट) स्थायी रूप से सुरम्य और प्राकृतिक वातावरण के बीच 12 एकड़ भू-भाग में स्थापित है। यहाँ कई किलोमीटर तक फैली जंगल की हरियाली, पेड़-पौधे और निरन्तर चल रही विशुद्ध और प्राकृतिक वायु ने इस स्थान को अद्भुत स्वास्थ्य प्रदाता बना दिया है। प्रकृति के गोद में विकसित किए जा रहे इस आयुष ग्राम में ऐसा प्रकृतिदत्‍त वातावरण बना हुआ है कि रोगी या स्‍वस्‍थ व्यक्ति स्वत: अपने को उर्जावान्, सकारात्‍मक, और शान्‍त अनुभव करने लगता है तथा तेजी से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करने लगता है।

सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य पूज्य सन्त श्री कामता प्रसाद वाजपेयी, गायत्री परिवार के समयदानी एवं पूर्व प्रवक्ता श्री राकेश प्रताप सिंह ‘भइया जी’, श्रीमती उषा जी, अनन्तराम त्रिपाठी एडवोकेट, प्रख्यात अधिवक्ता स्व॰ श्री जीवन प्रकाश शर्मा के सुपुत्र श्री प्रशांत शर्मा एडवोकेट हाईकोर्ट इलाहाबाद योगदान कर रहें है।

आयुष ग्राम ट्रस्ट चित्रकूट का ‘आयुष ग्राम चिकित्सालयम्’ नये-नये एवं जटिल रोगों को ‘ीक करने के लिये आयुष विज्ञान द्वारा विभिन्न तरीकों को अंगीकार आधुनिक युग की प्रगतियों को अपनाता है।

अग्रगामी सोच की प्रेरणा- किसी रोग के विभिन्न पहलुओं को जानने तथा उसके मूल तक पहुँचने के लिये आयुष ग्रम ट्रस्ट चित्र्ैटधाम ने आधुनिक प्रगतियों से संयुक्त आयुष विज्ञान के द्वारा आरोग्यदान हेतु ‘आयुष ग्राम चिकित्सालयम्’ की स्थापना की है।

वर्तमान अंग्रेजी चिकित्सा की स्थिति कैसे मिले स्वास्थ्य

१९९७ में विश्व स्वास्थ्य संगठ’न ने भारत को आगाह किया था कि बाजार में बिक रही चौरासी हजार अंग्रेजी दवाओं में से बहत्तर हजार दवाओं पर तुरन्त प्रतिबन्ध लगाना आवश्यक है क्योंकि ये दवायें मानव स्वास्थ्य के लिये हानिकारक हैं पर इन्हें प्रतिबंधित करना तो दूर आज इनकी संख्या दूनी हो गयी है। २००३ की रिपोर्ट के अनुसार भारत में नकली अंग्रेजी दवाओं का धन्धा डेढ़ लाख करोड़ रुपये प्रतिवर्ष हो गया था, अब और बढ़ गया है।

विश्व स्वास्थ्य संग’न ने यह भी कहा है कि भारत में मिलने वाली मलेरिया, ब्लडप्रेशर, बुखार, टी.वी. जैसी बीमारियों  की २५ प्रतिशत अंग्रेजी दवायें नकली हैं। इसके पीछे कारण यह है कि अंग्रेजी दवाओं का शोध, स्वास्थ्य के लिये कम और फार्मा कम्पनियों की दवाओं के बिकवाने के लिये अधिक हो रहे हैं। अधिक कमीशन, विदेशों में सैर-सपाटे व मेहमाननवाजी के लालच में डॉक्टर, मीडिया और समाज सेवी संस्थायें तक इस काम में लगी हैं। फिर भारत की जनता को इस षडयंत्र से कौन बचाये?

तब केवल उपाय यह है कि हम अपने देश की प्राचीन और प्रामाणित चिकित्सा आयुष को और अपनायें जिसे अब भारत सरकार भी आगे ला रही है और विदेशों में भी माँग बढ़ी हुई है।

अंग्रेजी दवा के अविष्कारों का हाल यह है कि कोई भी नया आविष्कार १०-१५ वर्षों में ही नए आविष्कार के साथ अधूरा, अवैज्ञानिक और हानिकारक घोषित कर दिया जाता है। इसलिये अंग्रेजी चिकित्सा के पंच सितारा अस्पतालों, भव्य ऑपरेशन थियेटरों और डॉक्टरों से प्रभावित होने की बजाय यह ज्यादा अच्छा होगा कि हजारों वर्षों से प्रमाणित भारत की आयुष चिकित्सा को समझकर फिर उसी की ओर लौटें तथा अन्य को लौटायें अन्यथा बहुत बुरे दिन देखने होंगे।

ज्यों-ज्यों अंग्रेजी दवाइयों, खास रूप से अंग्रेजी एण्टीबायोटिक्स का प्रयोग बढ़ रहा है तथा ज्यों-ज्यों भारत के लोग भारतीय जीवनशैली को भुलाकर स्वच्छन्द जीवनशैली में जीने लगे हैं, त्यों-त्यों किडनी पेâल्योर, हार्ट, वैंâसर, मधुमेह के मामले बढ़ते जा रहे हैं। डायलेसिस केन्द्रों और हार्ट केन्द्रो में जाकर देखिये कि क्या त्राहि-त्राहि मची हुयी है।

आज पहली जरूरत यह है कि समाज में आयुर्वेदीय जीवनशैली और बचाव को कड़ाई से लागू कराया जाये जिससे कम से कम नवयुवक तो किडनी हार्ट, वैंâसर आदि के रोगी न हों। दूसरा ऐसा प्रयास किया जाय कि  बीमारी का पता चलते ही आयुष चिकित्सा में आयें। क्योंकि रोग की बढ़ी अवस्था में समय भी अधिक लगता है, खर्च भी अधिक होता है तथा परिणाम भी सन्दिग्ध रहता है।

आयुष के क्षेत्र में आयुष ग्राम (ट्रस्ट) द्वारा स्थापित ‘आयुष ग्राम चिकित्सालयम्’ एक ऐसा स्थान है जहाँ की चिकित्सा टीम जटिल से जटिल समस्याओं को नये-नये तरीके से हल करने के लिये कार्य कर रही है। नये और आधुनिक तथा शोध एवं भारतीय चिकित्सा के विज्ञान के तरीकों द्वारा चिकित्सा सम्बन्धी तत्वों को अधिक से अधिक सुलभ, लचीला (सुगम) और सस्ता बनाने का प्रयासरत है।

संस्थान के पास अनेक जटिल रोगों के निदान के लिये विभिन्न प्रकार की प्रभावी औषधियाँ आयुर्वेद की आधुनिक प्रगतियों तथा आयुर्वेदीय नाड़ी विज्ञान एवं दक्षिण भारत से शिक्षित प्रशिक्षित अनुभवी डाक्टरों की और प्रशिक्षित पैरा मेडिकल स्टॉफ की अनुभवी टीम उपलब्ध हैं।

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