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प्रातः 4 बजे ब्रह्ममुहूर्त में गंगा स्नान के उपरांत प्रातः 5 बजे से 11 बजे तक आयुर्वेद श्री देव अश्विनों महायज्ञ का विधिपूर्वक एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आयोजन सम्पन्न हुआ, जिसमें मुख्य यजमान के रूप में पूज्य गुरुजी आचार्य डॉ. मदन गोपाल वाजपेयी जी ने पूजन एवं आहुतियाँ अर्पित कीं। यह यज्ञ सम्पूर्ण आयुर्वेद कुम्भ 2025 के आध्यात्मिक एवं वैदिक आधार का सशक्त प्रतीक रहा।
यज्ञोपरांत प्रातः 11 बजे पूज्य आचार्य डॉ. मदन गोपाल वाजपेयी जी (राष्ट्रीय आयु०वि० गुरु, आयुष मंत्रालय, भारत सरकार) का विशेष व्याख्यान आयोजित हुआ, जिसमें लगभग 5000 आयुर्वेद चिकित्सकों एवं आयुर्वेद छात्रों से परिपूर्ण विशाल सभागार में उन्होंने “आहारं पचति शिखी दोषानाहारवर्जितः” (क्षेमकुतूहल) इस शास्त्रीय सूत्र के माध्यम से आहार, अग्नि एवं दोषों के सूक्ष्म वैज्ञानिक संबंध को व्यवहारिक उदाहरणों सहित स्पष्ट किया।
पूज्य गुरुजी ने अपने व्याख्यान के दौरान आयुष ग्राम चिकित्सालय, चित्रकूट के दो महत्वपूर्ण चिकित्सानुभव (केस स्टडी) प्रस्तुत किए, जिनसे आयुर्वेदिक चिकित्सा की प्रामाणिकता एवं प्रभावशीलता सुस्पष्ट रूप से प्रतिपादित हुई और पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजायमान हो उठा। व्याख्यान के उपरांत सभागार में उपस्थित अधिकांश आयुर्वेद चिकित्सकों में पूज्य गुरुजी से भेंट कर प्रणाम करने की होड़ लग गई, जिसके कारण पूज्य गुरुजी स्वयं अपने आसन से उठकर सभी को स्नेहपूर्वक आशीर्वाद प्रदान करते हुए उनसे संवाद हेतु आगे आए।
पूज्य गुरुजी का यह उद्बोधन उपस्थित सभी चिकित्सकों, विद्वानों एवं आयुर्वेद विद्यार्थियों को आयुर्वेद के प्रति नई दृष्टि, नई ऊर्जा, नई धारणाओं और वस्तिकर्म के वास्तविक स्वरूप को समझने का अद्वितीय अवसर प्रदान किया।
इस गरिमामय अवसर पर पूज्य गुरुजी को दो बार विशेष रूप से सम्मानित किया गया। प्रथम अवसर पर उन्हें सम्मान पत्र एवं अंगवस्त्र भेंट कर अभिनंदन किया गया तथा द्वितीय अवसर पर उन्हें “आप्त वैद्य” की प्रतिष्ठित उपाधि से अलंकृत कर सम्मानित किया गया, जो उनके दीर्घकालीन चिकित्सानुभव, शास्त्रनिष्ठा एवं आयुर्वेद सेवा का सार्वजनिक सम्मान था।
इस कार्यक्रम में मंचासीन रूप से जगतगुरु शंकराचार्य राजराजेश्वर आश्रम के महंत, हनुमान गढ़ी अयोध्या से पूज्य रामानंद दास जी महाराज, वैद्य अतुल वार्ष्णेयNCISM वैद्य श्री शशि कुमार RAV (ayush mantraly), वैद्य राजेश जी, वैद्य नंदकिशोर जी, वैद्य उपेन्द्र दीक्षित गोवा(RAV ayush मंत्रालय)तथा महंत रविंद्र गिरी जी महाराज की पावन उपस्थिति रही।
साथ ही पूज्य गुरुजी के आर०ए०वी० (RAV) शिष्यगण डॉ. अनुराधा जी, डॉ. रितिका जी एवं डॉ. कपिल कुमार जी तथा आयुष ग्राम चिकित्सालय, चित्रकूट से पूज्य गुरुजी के साथ पधारे समस्त चिकित्सीय स्टाफ एवं अन्य शिष्य भी उपस्थित रहे।
अनेक शिष्यों एवं आयुर्वेद चिकित्सकों ने पूज्य गुरुजी से प्रेरणा लेकर उनके सान्निध्य में रहकर आयुर्वेद अध्ययन एवं साधना को आगे बढ़ाने की इच्छा व्यक्त की, जिससे यह आयोजन साधना, शास्त्र, संत परंपरा एवं चिकित्सानुभव का एक सजीव और प्रेरणादायी संगम सिद्ध हुआ।
दिनांक 17 नवंबर 2025 दिन सोमवार को हाईगार्डन होटल बुलन्दशहर में अखिल भारतीय आयुर्वेद महासम्मेलन, नई दिल्ली एवं भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग द्वारा संबद्ध आयोजित "10 क्रेडिट प्वाइंट सी एम ई" कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता आचार्य डॉ० मदन गोपाल वाजपेयी, वैद्य गोपाल दत्त शर्मा, श्री रंजीत पुराणिक ( मैनेजिंग डायरेक्टर श्री धूतपापेश्वर प्रा० लि०), वैद्य ताराचंद शर्मा , डॉ० निरंजन सिंह त्यागी, डॉ० रामदास आव्हाड एवं कार्यक्रम के संयोजक डॉ० हितेश कौशिक ने दीप प्रज्ज्वलित कर जगद्रोगहर्ता भगवान् धन्वंतरी का पूजन कर कार्यक्रम के सफल आयोजन की कामना करते हुए शुभारम्भ किया।
इसी अनुपम अवसर पर पूज्य आचार्य डॉ. मदनगोपाल वाजपेयी जी (राष्ट्रीय आयु० वि०गुरु भारत सरकार आयुष मंत्रालय एवं संस्थापक अध्यक्ष : आयुष ग्राम न्यास, चित्रकूट की गरिमामयी उपस्थिति एवं प्रेरक शास्त्रीय व्याख्यान “वस्तिकर्म एक चिकित्सा : लाभ अनेक” कार्यक्रम में उपस्थित समस्त आयुर्वेद परास्नातक छात्रों एवं आयुर्वेदाचार्यों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र एवं ज्ञानोपयोगी रहा। गुरुजी ने सुश्रुत का दिव्य सिद्धांत उद्धृत करते हुए कहा कि जिस प्रकार भगवान सूर्य हजारों किलोमीटर दूर से पृथ्वी के रसों को खींचकर सोखते हैं, उसी प्रकार वस्ति गुदामार्ग में पहुँचकर आपाद-मस्तक सभी विकारों को खींच लेती है, वस्ति केवल एक कर्म नहीं, बल्कि सम्पूर्ण चिकित्सा है जो शरीर, मन और दोषों—तीनों को संतुलित करती है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट कहा कि समाज में आयुर्वेद के प्रति व्याप्त भ्रांति कि यह धीरे धीरे काम करता है इसको अपने चिकित्सा अनुभव के माध्यम से दूर करते हुए साझा किया कि आयुष ग्राम चिकित्सालय में अधिकतर क्रिटिकल रोगी ही आते हैं और उनमें बहुत अच्छा परिणाम भी प्राप्त होता है। लेकिन उसके लिए आयुर्वेद का गहन अध्ययन और प्रयोग करने की आवश्यकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि 13 वर्षों बाद बुलन्दशहर की पुण्यभूमि पर आगमन और विशेषकर अपने संगठनशील, कर्मनिष्ठ लघुभ्राता वैद्य हितेश कौशिक के निमंत्रण पर उपस्थित होना सौभाग्य का विषय है। गुरुजी ने महर्षि चरक, वागभट्ट एवं अन्य आयुर्वेद प्रवर्तक ऋषियों के संदर्भ देते हुए स्पष्ट किया कि वस्ति आयुर्वेद की सर्वोत्तम शोधन एवं संयमक चिकित्सा है, वात-विकारों, मनोवैज्ञानिक एवं स्नायु संबंधी अनेक रोगों में विलक्षण परिणाम देती है, पंचकर्म का वास्तविक सौन्दर्य वस्ति से प्रकट होता है और यह शरीर में संचित आम, दोषों तथा विकारों को भीतर से खींचकर बाहर करती है। साथ ही कहा कि मेरा संपूर्ण चिकित्सा कार्य वस्ति कर्म में ही आधारित रहा।
पूज्य गुरुजी का यह उद्बोधन उपस्थित सभी चिकित्सकों, विद्वानों एवं आयुर्वेद विद्यार्थियों को आयुर्वेद के प्रति नई दृष्टि, नई ऊर्जा, नई धारणाओं और वस्तिकर्म के वास्तविक स्वरूप को समझने का अद्वितीय अवसर प्रदान किया।
इस कार्यक्रम में 300 से अधिक आयुर्वेद प्रेमियों की उपस्थिति रही।
इस सफल आयोजन के लिए भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग, उत्तर प्रदेश आयुर्वेदिक बोर्ड, आयोजन समिति, सभी विद्वान वक्ताओं और सभी प्रतिभागियों के प्रति हार्दिक कृतज्ञता—आयुर्वेद के इस वैश्विक महत्व के युग में ऐसे कार्यक्रम न केवल ज्ञान को धार देते हैं बल्कि आधुनिक चिकित्सा-दृष्टि को भी सुदृढ़ आधार प्रदान करते हैं।
दिनांक – 3 नवम्बर 2025 – धन्वंतरि पीठ, आयुष ग्राम (न्यास), चित्रकूटधाम में चल रही श्रीमद् वाल्मीकि रामायण नवाह यज्ञ की नवम दिवस की कथा का पावन समापन हुआ।
पूज्य श्री 108 श्री स्वामी गुरु प्रपन्नदास जी महाराज (मानसपीठ खजुरीताल) के सान्निध्य में यह दिव्य कथा श्रृंखला संपन्न हुई।
नवम दिवस की कथा में श्रीराम राज्याभिषेक का मनोहर एवं भावविभोर कर देने वाला प्रसंग हुआ।
पूरे परिसर में “जय श्रीराम” के जयघोष, पुष्पवर्षा और मंगल वाद्य की मधुर ध्वनि के साथ वातावरण आनंद, भक्ति और उल्लास से भर उठा। श्रद्धालुजन श्रीरामराज्य के इस भावमय प्रसंग में भक्ति-सागर में डूबते नजर आए।
कथा के पश्चात पूज्य आचार्य डॉ. मदनगोपाल वाजपेयी जी (राष्ट्रीय आयुर्वेद गुरु, भारत सरकार – आयुष मंत्रालय एवं अध्यक्ष, आयुष ग्राम ट्रस्ट, चित्रकूट) के सान्निध्य में पूर्णाहुति हवन संपन्न हुआ। पूज्य महाराज जी और पूज्य गुरुजी ने वेदमंत्रों की गूंज के मध्य यज्ञ में आहुति प्रदान की।
हवन के उपरांत भव्य भंडारा एवं प्रसाद वितरण हुआ, जिसमें गुरुकुलम के छात्र-छात्राएं, आचार्यगण, चिकित्सालय एवं फार्मेसी का समस्त स्टाफ, श्रद्धालु एवं भक्तजन बड़ी संख्या में सम्मिलित हुए।
पूज्य गुरुजी ने अपने उद्बोधन में कहा —
“यह कथा केवल श्रवण नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और लोककल्याण का साधन है। महाराज जी ने रामराज्य के सिद्धांतों को सहज भाव में हमारे हृदयों में उतारा है। हमें इन आदर्शों को अपने जीवन में धारण कर समाज और राष्ट्र के उत्थान में योगदान देना चाहिए।”
पूज्य स्वामी गुरु प्रपन्नदास जी महाराज ने भी सभी श्रद्धालुओं को आशीर्वचन देते हुए कहा —
“श्रीराम का जीवन सत्य, त्याग, प्रेम और सेवा का आदर्श है। जब-जब हम इन मूल्यों को अपनाएंगे, तब-तब रामराज्य हमारे जीवन में उतरेगा।”
कथा के सफल आयोजन में आयुष ग्राम ट्रस्ट, धन्वंतरि पीठ, गुरुकुलम एवं चिकित्सालय परिवार का समर्पित सहयोग रहा। सभी श्रद्धालुओं ने इस दिव्य कथा और यज्ञ का पुण्य लाभ प्राप्त किया
दिनांक – 2 नवम्बर 2025 - धन्वंतरि पीठ, आयुष ग्राम (न्यास) चित्रकूटधाम में चल रही श्रीमद् वाल्मीकि रामायण नवाह यज्ञ की अष्टम दिवस की कथा आज अत्यंत भावपूर्ण एवं भक्ति रस से ओतप्रोत वातावरण में संपन्न हुई। कथा व्यास पूज्य श्री 108 श्री स्वामी गुरु प्रपन्नदास जी महाराज (मानसपीठ खजुरीताल) ने आज भरत मिलाप के प्रसंग का गहन और भावविभोर कर देने वाला वर्णन किया। जब महाराज जी ने राम-भरत मिलन की वह दिव्य वेला चित्रित की, तो कथा स्थल में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। यह प्रसंग न केवल भक्ति का, बल्कि त्याग, सत्य और धर्म के आदर्शों का सर्वोच्च प्रतीक है।
आज के विशेष अवसर पर कथा में श्री रामाशीष यादव (आर०आई०, पुलिस लाइन चित्रकूट) का आगमन हुआ। उन्होंने व्यासपीठ का ससम्मान पूजन किया, तत्पश्चात व्यासपीठ द्वारा भी उनका आदरपूर्वक सम्मान किया गया। पूज्य आचार्य डॉ. मदनगोपाल वाजपेयी जी (राष्ट्रीय आयुर्वेद गुरु, भारत सरकार – आयुष मंत्रालय एवं अध्यक्ष, आयुष ग्राम ट्रस्ट चित्रकूट) ने कुछ दिवस पूर्व चित्रकूट पुलिस कर्मियों को “मानसिक स्वास्थ्य एवं आध्यात्मिक संतुलन” विषय पर व्याख्यान दिया था। इस अवसर पर उस आयोजन में सहयोग प्रदान करने वाली डॉ. अनुराधा कुमारी एवं कुमारी वंदना यादव को भी आर०आई० श्री रामाशीष यादव जी द्वारा प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया।
कथा में अन्य विशिष्ट अतिथियों में श्री रामबहादुर त्रिपाठी ( पूर्व प्रबंधक, आयुष ग्राम गुरुकुलम), डॉ० विष्णु त्रिपाठी (नरैनी), श्री अवधेश मिश्रा जी, श्री गोविंद सिंह बघेल जी, श्री अजीत तिवारी जी, श्री राज नारायण पांडे जी, श्री भूपेंद्र पांडे जी, श्री अनिल शर्मा जी तथा डॉ. सीताराम गुप्त (वरिष्ठ चिकित्सक एवं जिला अध्यक्ष, आयुष मेडिकल एसोसिएशन, कर्वी) उपस्थित रहे। इन सभी श्रद्धेय अतिथियों ने व्यासपीठ का ससम्मान पूजन कर पूज्य महाराज जी से आशीर्वाद प्राप्त किया।
कथा में चित्रकूट के पुलिस अधीक्षक डॉ. अरुण कुमार सिंह जी की धर्मपत्नी जी भी उपस्थित रहीं, जिन्होंने भक्तिभाव से कथा श्रवण किया और पूज्य गुरुजी से आशीर्वाद प्राप्त किया।
कथा के समापन पर पूज्य आचार्य डॉ. मदनगोपाल वाजपेयी जी ने अपने दिव्य उद्बोधन में कहा —
“हम सभी अत्यंत सौभाग्यशाली हैं कि प्रभु श्रीराम की असीम कृपा से हमें इस कार्तिक मास में श्रीमद् वाल्मीकि रामायण श्रवण का अवसर प्राप्त हुआ है। पूज्य महाराज जी की कथा की महानता यह है कि वह केवल कथा नहीं, बल्कि दर्शन, उपासना और नीति का संगम भी बताते है। आज के भरत मिलाप प्रसंग में उन्होंने हमें धर्म के दस लक्षणों का बोध कराया और यह भी समझाया कि बिना भरत के ‘रामराज्य’ संभव नहीं।
रामराज्य स्थापित करने के लिए हमें भरत जैसे आदर्श को अपने जीवन में उतारना होगा — सत्य, त्याग, संयम और इंद्रियों पर नियंत्रण का आचरण ही सच्चा धर्म है।”
पूज्य गुरुजी ने आगे कहा कि जहाँ उपासना होती है वहाँ भगवान का वास होता है। भरत मिलाप केवल कथा नहीं, बल्कि यह संदेश है कि जब तक भरत भाव जीवित है, तब तक रामराज्य जीवित रहेगा।
पूरे कार्यक्रम में भक्तिमय वातावरण बना रहा। कथा श्रवण के समय उपस्थित सभी श्रद्धालु “जय श्रीराम” के उद्घोषों से वातावरण को गूंजायमान करते रहे।
दिनांक 31 अक्टूबर 2025 को धन्वंतरि पीठ, आयुष ग्राम (न्यास), सूरजकुंड रोड (आयुष ग्राम मार्ग), चित्रकूट धाम में चल रही श्रीमद् वाल्मीकि रामायण नवाह यज्ञ के षष्ठम दिवस की कथा में आज भगवान श्रीराम के वनवास और त्याग का हृदयस्पर्शी प्रसंग हुआ।
पूज्य श्री 108 श्री स्वामी गुरु प्रपन्नदास जी महाराज (मानसपीठ खजुरीताल) ने जब श्रीराम के वनगमन, जनकनंदिनी सीता और भ्राता लक्ष्मण के त्याग का वर्णन किया, तो सम्पूर्ण कथा स्थल भाव-विह्वल हो उठा। कथा के दौरान त्याग की कथा सुनकर श्रोतागणों की आँखें अश्रुपूरित हो गईं, अनेक श्रद्धालु अपने आँसू नहीं रोक सके — हर ओर “जय श्रीराम” के उद्घोष गूंज उठे।
इस अवसर पर पूज्य आचार्य डॉ. मदनगोपाल वाजपेयी (राष्ट्रीय आयुर्वेद गुरु, भारत सरकार – आयुष मंत्रालय एवं अध्यक्ष, आयुष ग्राम ट्रस्ट चित्रकूट) की पावन अध्यक्षता रही। कथा में डॉ. रामनारायण त्रिपाठी (गायत्री शक्ति पीठ चित्रकूटधाम), श्री अखंड प्रताप मिश्र (भाई साहब, प्रांत बौद्धिक प्रमुख, पूर्व विभाग प्रचारक चित्रकूट मंडल), श्री राजेंद्र तिवारी (एचएफ संस्थापक निदेशक), श्री दीपक तिवारी (विभाग प्रमुख), डॉ. विष्णु त्रिपाठी (नरैनी), श्री रामबहादुर त्रिपाठी (पूर्व प्रबंधक, आयुष ग्राम गुरुकुलम), श्री राजेंद्र प्रसाद द्विवेदी तथा श्री विमल मिश्रा (Uma Ayurvedics Pvt. Ltd.) सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कथा के उपरांत पूज्य आचार्य डॉ. मदनगोपाल वाजपेयी जी ने अपने आशीर्वचन में कहा — “महाराज जी के द्वारा ऐसे प्रसंग कहे जा रहे हैं, जो हमें सिखाते हैं कि जीवन में चाहे सुख मिले या दुःख, धर्म और मर्यादा से कभी विचलित नहीं होना चाहिए। पुनर्वस आत्रेय ने कहा है —
‘सुखार्थाः सर्वभूतानां मताः सर्वाः प्रवृत्तयः।
सुखं च न विना धर्मात् तस्माद्धर्मपरो भवेत्॥’हर जीव सुख चाहता है, किंतु धर्म के बिना सुख असंभव है। अतः धर्म ही सच्चे सुख का आधार है।”
पूज्य गुरुजी ने आगे कहा —
“महाराज जी ने त्याग की ऐसी कथा सुनाई जो मानवता के लिए अमर प्रेरणा है। आज के युग में छोटी-सी नियुक्ति या पद चला जाए तो मनुष्य व्यथित हो उठता है, परंतु प्रभु श्रीराम ने तो संपूर्ण राज्य, ऐश्वर्य और वैभव त्याग दिया। यह त्याग केवल श्रीराम का नहीं, अयोध्या के प्रत्येक नागरिक का त्याग था — माता कौशल्या का, भरत का, लक्ष्मण का, और जनकनंदिनी सीता का। यही रामत्व है — न सुख में डोलना, न दुःख में टूटना।”
कथा स्थल का वातावरण भक्ति, करुणा और प्रेरणा से परिपूर्ण हो उठा। सभी श्रद्धालु गद्गद कंठ से “जय श्रीराम” के उद्घोष करते हुए भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन को अपने हृदय में अंकित कर रहे थे।
कल दिनांक 30 अक्टूबर 2025 को धन्वंतरि पीठ – आयुष ग्राम (न्यास), सूरजकुंड रोड (आयुष ग्राम मार्ग), चित्रकूटधाम में चल रहे श्रीमद् वाल्मीकि रामायण नवाह यज्ञ के पंचम दिवस की कथा अत्यंत भक्ति, उल्लास और आध्यात्मिक वातावरण में संपन्न हुई।
कल की कथा में भगवान श्रीराम विवाह का पावन प्रसंग हुआ। पूज्य स्वामी गुरु प्रपन्नदास जी महाराज (मानसपीठ खजुरीताल) ने अपनी सरस वाणी में विवाह प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। कथा स्थल “जय सिया राम” के उद्घोषों से गुंजायमान हो उठा।
इस पावन अवसर पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय, चित्रकूट (उ.प्र.) के कुलपति प्रो. शिशिर पाण्डेय जी का स्नेहिल आगमन हुआ।
पूज्य आचार्य डॉ. मदनगोपाल वाजपेयी (राष्ट्रीय आयुर्वेद गुरु, भारत सरकार – आयुष मंत्रालय एवं अध्यक्ष, आयुष ग्राम ट्रस्ट चित्रकूट) के सान्निध्य में कुलपति जी का तिलक एवं पुष्पमाला से स्वागत किया गया। तत्पश्चात कुलपति जी ने कथा पीठ का पूजन किया और पूज्य गुरुजी से आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे — डॉ. अवध बिहारी द्विवेदी (पूर्व क्षेत्रीय आयुर्वेद यूनानी अधिकारी), श्री रामबहादुर त्रिपाठी (पूर्व प्रबंधक, आयुष ग्राम गुरुकुलम), श्री राजेंद्र प्रसाद द्विवेदी, श्री पुष्पेंद्र अरजरिया (अरजरिया मार्बल हाउस, झांसी), श्री विमल मिश्रा (Uma Ayurvedics Pvt. Ltd.)
सभी अतिथियों ने पूज्य गुरुजी के सान्निध्य में कथा श्रवण कर अपने आप को धन्य किया और आयोजन की सराहना की।
कुलपति प्रो. शिशिर पाण्डेय जी ने कहा — “श्रीराम कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज में संस्कार, मर्यादा और त्याग की शिक्षा देने का माध्यम है। पूज्य गुरुजी के सान्निध्य में इस प्रकार का आयोजन चित्रकूट और सम्पूर्ण समाज के लिए एक प्रकाशपुंज है।”
पूज्य गुरुजी आचार्य डॉ. मदनगोपाल वाजपेयी ने अपने आशीर्वचन में कहा — “श्रीराम विवाह प्रेम, मर्यादा और धर्म के आदर्श का प्रतीक है। जो अपने जीवन में श्रीराम के आदर्शों को धारण करता है, वही सच्चे अर्थों में जीवन का यज्ञ पूर्ण करता है।”
कार्यक्रम में आयुष ग्राम ट्रस्ट, चिकित्सालय, गुरुकुलम के आचार्यगण, विद्यार्थी, सेवकगण एवं सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथा स्थल भक्ति संगीत, पुष्पवर्षा और श्रीराम नाम के गुंजन से अनुपम आध्यात्मिक वातावरण में डूबा रहा।
आज षष्ठम दिवस की कथा में सभी श्रद्धालु सपरिवार आमंत्रित हैं।
दिनांक 29 अक्टूबर 2025 को धन्वंतरि गोसेवालय – आयुष ग्राम (न्यास), सूरजकुंड रोड (आयुष ग्राम मार्ग), चित्रकूटधाम में गोपाष्टमी महोत्सव का आयोजन अत्यंत भक्ति, उत्साह और सेवा-भाव के वातावरण में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ गौ पूजन के साथ हुआ, तत्पश्चात अतिथियों का सम्मान एवं आशीर्वचन हुए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता पूज्य आचार्य डॉ. मदनगोपाल वाजपेयी (राष्ट्रीय आयुर्वेद गुरु, भारत सरकार, आयुष मंत्रालय एवं अध्यक्ष – आयुष ग्राम ट्रस्ट, चित्रकूट) के सान्निध्य में हुई।
मुख्य अतिथि के रूप में पूज्य श्री 108 श्री स्वामी गुरु प्रपन्नदास जी महाराज (मानसपीठ, खजुरीताल) तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में दिव्य ज्योति जीवन दास महाराज जी (भरत मंदिर, चित्रकूट) पधारे।
इस अवसर पर डॉ. सुरेश कुमार (सी०वी०ओ० – पशु चिकित्साधिकारी), डॉ. मनोज कुमार (डिप्टी सी०वी०ओ०), विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष श्री राजेन्द्र त्रिवेदी, जिला मंत्री श्री नीरज केशरवानी, बजरंग दल के कार्यकर्ता प्राणव भारद्वाज, विमल त्रिपाठी, सोनू मोदी, अंकुर त्रिवेदी, कुलदीप जी एवं अभिषेक तिवारी सहित अनेक गणमान्य जन उपस्थित रहे।
आयुष ग्राम चिकित्सालय का समस्त स्टाफ, गुरुकुल के शिक्षक एवं विद्यार्थी भी कार्यक्रम में सम्मिलित हुए।
अपने उद्बोधन में दिव्य ज्योति जीवन दास महाराज जी ने कहा -
“धन्य हैं आचार्य डॉ. मदनगोपाल वाजपेयी जी, जिन्होंने इस पावन चित्रकूट की भूमि पर इतनी विशाल, शुद्ध और सुव्यवस्थित गौशाला की स्थापना की। यह सेवा कार्य अपने आप में भागीरथ प्रयत्न के समान है, जो समस्त समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। धनवंतरि गोसेवालय में जितनी निष्ठा और अनुशासन से सेवा होती है, वह अद्वितीय है। गुरुजी ने इस भूमि को पुनः धन्य कर दिया है।”
पूज्य गुरुजी आचार्य डॉ. मदनगोपाल वाजपेयी ने अपने आशीर्वचन में कहा -
“गौ हमारी मातृशक्ति हैं। मेरा संकल्प है कि प्रत्येक गौ का रखरखाव राजमाता के समान किया जाए। यदि निष्काम भाव से, आलस रहित होकर गौ सेवा की जाए तो जीवन में आरोग्य, शांति और सिद्धि प्राप्त होती है। प्रत्येक गौ कामधेनु स्वरूप है, जो सेवा करेगा वही सच्चा लाभ पाएगा। वैज्ञानिक दृष्टि से भी यह सिद्ध है कि जो व्यक्ति प्रतिदिन गौ के गले में हाथ फेरता है, उसे हृदय और रक्तचाप संबंधी रोग नहीं होते।”
इस अवसर पर डॉ. सुरेश कुमार (सीवीओ) ने कहा —
“आयुष ग्राम में आने में देर हो गई, मुझे बहुत पहले आना चाहिए था। यहां की गोसेवालय व्यवस्था अत्यंत अनुकरणीय है। जो कुछ यहां किया जा रहा है, उससे पूरे विभाग और अन्य गौशालाओं को सीखने की आवश्यकता है। हम सेवा के लिए सदैव तत्पर हैं।”
कार्यक्रम के समापन पर श्री राजेन्द्र त्रिवेदी जी ने सभी अतिथियों, कर्मचारियों और उपस्थित श्रद्धालुजनों के प्रति आभार व्यक्त किया।
अंत में आयुष ग्राम गोसेवालय के सभी कर्मचारियों को सम्मानित एवं पुरस्कृत किया गया।
यह आयोजन गौसेवा, श्रद्धा और सनातन संस्कृति के गौरव का जीवंत प्रतीक रहा।
दिनांक 28 अक्टूबर 2025 को धन्वंतरि पीठ – आयुष ग्राम (न्यास), सूरजकुंड रोड (आयुष ग्राम मार्ग), चित्रकूटधाम में चल रहे श्रीमद् वाल्मीकि रामायण नवाह यज्ञ के तृतीय दिवस की कथा भाव, भक्ति और आस्था से ओतप्रोत वातावरण में संपन्न हुई।
आज की कथा में भगवान श्रीराम जन्म का अत्यंत मंगलमय प्रसंग हुआ। पूज्य श्री 108 स्वामी गुरु प्रपन्नदास जी महाराज (मानसपीठ खजुरीताल) ने अपनी अमृतमयी वाणी में प्रभु श्रीराम के अवतरण की महिमा का वर्णन करते हुए संपूर्ण कथा स्थल को आनंदमय बना दिया।
पूरे परिसर में “जय श्रीराम” के उद्घोष और शंखध्वनि के साथ श्रद्धालु भक्त भाव-विभोर होकर झूम उठे।
पूज्य आचार्य डॉ. मदनगोपाल वाजपेयी (राष्ट्रीय आयुर्वेद गुरु, भारत सरकार आयुष मंत्रालय एवं अध्यक्ष, आयुष ग्राम ट्रस्ट चित्रकूट) के सान्निध्य में कथा का यह दिवस अत्यंत पावन एवं हृदयस्पर्शी रहा।
गुरुकुलम के बटुकों, आचार्यों एवं समस्त श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर प्रभु श्रीराम के जन्मोत्सव का उत्सव भक्तिभाव से मनाया।
आज दिनांक 27 अक्टूबर 2025 को धन्वंतरि पीठ – आयुष ग्राम (न्यास), सूरजकुंड रोड (आयुष ग्राम मार्ग), चित्रकूटधाम में चल रहे “श्रीमद् वाल्मीकि रामायण नवाह यज्ञ” के द्वितीय दिवस की कथा अत्यंत भक्तिमय और भावपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई।
पूज्य श्री 108 श्री स्वामी गुरु प्रपन्नदास जी महाराज (मानसपीठ खजुरीताल) के श्रीमुख से रामकथा का अमृत प्रवाहित हुआ। पूज्य आचार्य डॉ. मदनगोपाल वाजपेयी (राष्ट्रीय आयुर्वेद गुरु, भारत सरकार, आयुष मंत्रालय) के सान्निध्य एवं आशीर्वाद से पूरा परिसर श्रीराम नाम और भक्ति भाव से गुंजायमान रहा।
आज की कथा में महाराज जी ने श्रीराम जन्म, बाललीला एवं ऋषि-मुनियों के प्रति श्रीराम के आदर्श आचरण का अत्यंत हृदयस्पर्शी वर्णन किया। कथा श्रवण कर उपस्थित श्रद्धालु भक्ति, प्रेम और प्रेरणा से अभिभूत हो उठे।
गुरुकुलम के आचार्यगण, छात्र-छात्राएँ और आयुष ग्राम परिवार के सदस्यगणों की सहभागिता ने कथा की गरिमा को और दिव्यता प्रदान की।
आप सभी श्रद्धालुजन आगामी दिवसों की कथा में अवश्य सहभागी बनें और श्रीराम कथा श्रवण से मन, वचन और कर्म को पवित्र करें।
आज दिनांक 26 अक्टूबर 2025 से धन्वंतरि पीठ – आयुष ग्राम (न्यास), सूरजकुंड रोड (आयुष ग्राम मार्ग), चित्रकूटधाम में पूज्य गुरुजी आचार्य डॉ. मदनगोपाल वाजपेयी (राष्ट्रीय आयु०वि० गुरु, भारत सरकार, आयुष मंत्रालय) के सान्निध्य में “श्रीमद् वाल्मीकि रामायण नवाह्न यज्ञ” का शुभारंभ हुआ।
इस पावन अवसर पर मानसपीठ खजुरीताल से पूज्य श्री 108 श्री स्वामी गुरु प्रपन्नदास जी महाराज (कथा व्यास) का सान्निध्य प्राप्त होगा।
गुरुकुलम के सभी छात्र-छात्राएँ, समस्त चिकित्सालय स्टाफ, आचार्यगण एवं श्रद्धालुजन महाराज जी के स्वागत हेतु उपस्थित रहेंगे।
पूज्य महाराज जी के कर-कमलों से कथा का मंगलारंभ होगा एवं संपूर्ण परिसर श्रीराम नाम एवं भक्ति भाव से ओतप्रोत होगा।
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आप सभी श्रद्धा एवं भक्ति भाव से सहभागी बनकर इस दिव्य कथा का पुण्य लाभ प्राप्त करें।
दिनांक 19 अक्टूबर 2025 (रविवार) को भगवान् के द्वादश अवतार, आयुर्वेद विज्ञान के प्रवर्तक, अमृत कलशधारक, रोगहर्ता तथा शल्य शास्त्र के आविष्कारक भगवान् धन्वंतरि के अवतरण पर्व पर धन्वंतरि पीठ, आयुष ग्राम (न्यास), सूरजकुंड रोड (आयुष ग्राम मार्ग), चित्रकूटधाम में भव्य आयोजन सम्पन्न हुआ।
इस पावन अवसर पर भगवान् धन्वंतरि का अश्विनी सूक्त से दुग्धाभिषेक, पूजन, यज्ञ-हवन एवं प्रसाद वितरण सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में राष्ट्रीय आयु०वि० गुरु : (आयुष मंत्रालय, भारत सरकार) एवं आयुष ग्राम (ट्रस्ट) के संस्थापक आचार्य डॉ. मदनगोपाल वाजपेयी जी की प्रमुखता में कार्यक्रम संपन्न हुआ। भगवान् धन्वंतरि जी का विधिवत् वैदिक मंत्रों द्वारा पूजन कर समस्त प्राणियों के आरोग्य मार्ग हेतु कामना एवं प्रार्थना की।
यह कार्यक्रम आयुर्वेद, आरोग्य और अध्यात्म के संगम का सजीव प्रतीक रहा। प्रधानमंत्री जी के सेवानिवृत्त सुरक्षाधिकारी श्री प्रतापनारायण पाण्डेय, ने बताया कि यहाँ के कार्यक्रम देखकर वास्तव में ऐसा महसूस हुआ कि हमारी जो सनातन संस्कृति है इसका पालन इस आयुष ग्राम में यहाँ के प्रमुख पूज्यनीय आचार्य डॉ० मदनगोपाल वाजपेयी जी द्वारा जो किया जा रहा है, मैं यहाँ की परम्परा से बहुत ही प्रभावित हूँ। आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास करता हूँ कि इस तरह की परम्परायें हम सब लोगों को मिलकर के आगे बढ़ाना चाहिए साथ ही आयुर्वेद में बतायी गयी दिनचर्या एवं खान-पान का पालन करना चाहिए।
चित्रकूट के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सीताराम गुप्त ने भगवान् धन्वन्तरि का पूजन एवं आयुर्वेद के विषय पर प्रकाश डाला। अपने उद्बोधन आचार्य डॉ० वाजपेयी ने सभी भगवान् धन्वंतरि के मार्ग में चलने का संकल्प दिलाया। आचार्य डॉ. वाजपेयी ने बताया कि
सेवाधर्मो परम गहनो योगिनामप्यगम्य: सेवा का जो धर्म है वह बहुत गहन और कठिन है यह योगियों के लिए भी दुर्लभ है पर है उन्नतिकारक। भगवान् धन्वन्तरि ने आयुर्वेद का प्रवर्तन कर शारीरिक रोगों के साथ साथ मानसिक रोगों के उपचार का साधन मानव को दिया। मानसिक रोगों के क्रम में आयुर्वेद रोगी को तमोगुण से मुक्त करके रजोगुण और सतोगुण की ओर ले जाता है। चूंकि तमोगुण का मूल कार्य प्राणियों में जांगलत्व को उत्पन्न करना है, इसलिए आयुर्वेद प्राणी को जांगलत्व से उबार कर उसे सतोगुणी बनाता है। चूंकि आज के ही दिन ऐसे वैदिक विज्ञान आयुर्वेद के जन्मदाता भगवान धन्वंतरि का मनुष्य रूप में अवतरण हुआ था इसलिए हम इस त्योहार को उनके जन्मोत्सव के रूप में मनाते है। उन्होंने आगे कहा कि धनु का एक अर्थ शल्य क्रिया भी है। जिस महापुरुष ने शल्य शास्त्र के अंत को प्राप्त कर लिया हो उसे धन्वंतरि कहा जाता है। भगवान धन्वंतरि ने शल्य चिकित्सा का आविष्कार कर उसका सम्पूर्ण ज्ञान अपने अत्यंत प्रिय शिष्य आचार्य सुश्रुत को दिया और उनको विश्व के प्रथम सर्जन के रूप में प्रतिष्ठापित किया।
इस कार्यक्रम का संचालन डॉ० वेदप्रताप वाजपेयी द्वारा किया गया। कार्यक्रम में डॉ. आशुतोष त्रिपाठी, डॉ० विष्णुकान्त त्रिपाठी नरैनी, डॉ० रितिका सैनी (सीआरएवी), श्री बाल्मीकी द्विवेदी, मैनेजर आयुष ग्राम ट्रस्ट, श्री आलोक कुमार, कार्य पालन अधिकारी सहित आयुष ग्राम गुरुकुलम के छात्रों और आचार्यों तथा आयुष ग्राम गुरुकुलम के समस्त फार्मासिस्टों एवं नर्सिंग स्टाफ ने उत्साह पूर्वक भाग लिया। इसके बाद सभी कर्मचारियों को मिष्ठान एवं प्रोत्साहन सम्मान दिया गया।
राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ, आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशानुसार, आयुष ग्राम ट्रस्ट, चित्रकूट में १०वें आयुर्वेद दिवस पर मंत्रालय द्वारा घोषित विषयक ‘आयुर्वेद जनजन के लिए, पृथ्वी के कल्याण के लिए’ विषयक भाषा संगोष्ठी परिषद का आयोजन किया गया। संगोष्ठी परिषद् के प्रथम सत्र का शुभारंभ प्रो. (डॉ.) एस०एन० सिंह, पूर्व निदेशक, आयुर्वेद सेवायें, उ०प्र० द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। इस सत्र में आयुष ग्राम ट्रस्ट के संस्थापक आचार्य डॉ. मदनगोपाल वाजपेयी जी, प्रो. (डॉ.) जे०पी० अवस्थी, पूर्व विभागाध्यक्ष द्रव्यगुण विभाग, राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय, अतर्रा बांदा, डॉ. आदर्श कुमार त्रिपाठी, पूर्व प्राचार्य डायट, शिवरामपुर, डॉ. सीताराम गुप्ता, वरिष्ठ चिकित्सक, कर्वी तथा श्री अनन्तराम त्रिपाठी,एडवोकेट, सचिव आयुष ग्राम ट्रस्ट, एवं श्री राजेन्द्र त्रिवेदी, जिलाध्यक्ष विहिप उपस्थित रहे।
इस सत्र में आरएवी शिष्य डॉ. कपिल कुमार, डॉ. शोभना शर्मा, डॉ. अनुराधा, डॉ. रितिका सैनी, सहित अनेक अतिथि गणों ने अपने विचार व्यक्त करते हुए, आयुर्वेद के प्रचार प्रसार के माध्यम से आम जन को आयुर्वेदीय जीवन शैली अपनाने और स्वस्थ रहने का मंत्र बताने और आयुर्वेद चिकित्सा के प्रभाव और गुणों से अवगत कराने पर ज़ोर दिया।
प्रथम सत्र के समापन कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए प्रो० एस०एन० सिंह जी ने कहा कि
हमें किसी भी चिकित्सा पद्धति की बुराई नहीं करना चाहिए। बल्कि हमें अपनी पद्धति को सर्वश्रेष्ठ सिद्ध करने के लिए पूर्ण निष्ठा एवं शास्त्र के अनुसार चिकित्सा एवं नये-नये शोध करना चाहिए।
संगोष्ठी परिषद के दूसरे सत्र का शुभारंभ पद्मश्री डॉ. वीके जैन, निदेशक सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय एवं अध्यक्ष रायपुर (छ०ग०) चित्रकूट सतना एवं डॉ. एके सिंह, पुलिस अधीक्षक, चित्रकूट धाम ने किया। इस सत्र में आचार्य डॉ. मदन गोपाल वाजपेयी, प्रो. (डॉ.) आशीष अग्रवाल, प्राचार्य राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय, अतर्रा बांदा, डॉ० सत्येन्द्र पटेल, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी बाँदा, श्री राजनारायन द्विवेदी, प्रतिनिधि चेयरमैन, नगर पंचायत, ओरन, बांदा तथा डॉ. राकेश श्रीवास्तव, संकायाध्यक्ष ग्रामोदय विश्वविद्यालय मंचासीन रहे।
अपने उद्बोधन में आचार्य डॉ. मदनगोपाल वाजपेयी जी ने २३ सितंबर को आयुर्वेद दिवस मनाने के पीछे उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए बताया कि
२३ सितंबर को रात और दिन बराबर होते हैं इसलिए यह दिन हमे संदेश देता है कि हमें अपने त्रिदोषों को संतुलित रखना चाहिए और यदि हम २ और ३ को जोड़ दें तो ५ होता है जो यह संदेश देता है कि सृष्टि में जो कुछ भी उपलब्ध है वह पाँच महाभूतों पर ही आधारित है। चूंकि आयुर्वेद व्यक्ति परक चिकित्सा है, इसलिए यह इन्ही पाँच महाभूतों पर आधारित है। आयुर्वेद का स्पष्ट मानना है कि जब आयुर्वेदाचार्य प्रत्येक मानव प्रकृति, गुण, स्वभाव अलग अलग होते हैं तो उनकी चिकित्सा भी अलग अलग होनी चाहिए। साथ ही दूसरी चिकित्सा पद्धति का सम्मान करते हुए हमें अपनी चिकित्सा पद्धति में नये-नये शोधों एवं शास्त्रोक्त क्रियाकलापों से उच्च श्रेणी पर स्थापित करने का प्रयास करना चाहिए तभी ऐसे दिवस मनाने की सार्थकता सिद्ध होगी।
इस अवसर पर डॉ. अरुण कुमार सिंह पुलिस अधीक्षक, चित्रकूट ने अपने उद्बोधन में अत्यंत महत्वपूर्ण संदेश देते हुए कहा कि
आयुर्वेद चिकित्सक अपनी चिकित्सा में आचार्य डॉ. वाजपेयी के समान सफल होना चाहते हैं तो उंसके सानिध्य में रहकर शास्त्रों का गहन अध्ययन करें और निरंतर अध्ययन करने की आदत विकसित करें।
अपने उद्बोधन में पद्मश्री डॉ. वीके जैन ने आयुर्वेद चिकित्सकों को प्रेरित करते हुए कहा कि
आयुर्वेद अभी भी ईविडेंस बेस्ड चिकित्सा के क्षेत्र आधुनिक चिकित्सा से बहुत पीछे है। इसलिए आप लोग आचार्य डॉ. वाजपेयी जी के संरक्षण में आयुर्वेद के प्राचीन ग्रन्थों का अध्ययन करें और औषधियों के मूल में जाकर शोध करें।
इसके साथ अन्य गणमान्य अथितियों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन श्री केशव शिवहरे जी ने किए। कार्यक्रम से समापन पर श्री अनंत राम त्रिपाठी, एडवोकेट, सचिव आयुष ग्राम ट्रस्ट ने आए हुए अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
१०वें राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के उपलक्ष्य में भारत सरकार : आयुष मंत्रालय की आर०ए०वी० के निर्देशन में ‘‘आयुर्वेद जन-जन के लिए, पृथ्वी के कल्याण के लिए’’ इस उद्देश्य को सार्थक करने के उद्देश्य से आयुष ग्राम (ट्रस्ट) ।। आयुष ग्राम चिकित्सालय के संस्थापक आचार्य डॉ० मदनगोपाल वाजपेयी राष्ट्रीय गुरु भारत सरकार : आयुष मंत्रालय के नेतृत्व में आयुष ग्राम चिकित्सालय परिसर में संचालित आयुष ग्राम गुरुकुलम् के विद्यार्थियों द्वारा चित्रकूट इण्टर कॉलेज कर्वी में लघु नाटक : आयुर्वेदोऽमृतानाम् का मंचन किया गया। जिसका शुभारम्भ चित्रकूट इण्टर कॉलेज कर्वी के कार्यवाहक प्रधानाचार्य श्री फूलचन्द्र चन्द्रवंशी, आयुष ग्राम (ट्रस्ट) ।। आयुष ग्राम चिकित्सालय के संस्थापक आचार्य डॉ० मदनगोपाल वाजपेयी राष्ट्रीय गुरु भारत सरकार : आयुष मंत्रालय,श्री दिनेश मिश्र कर्वी, चित्रकूट द्वारा दीप प्रज्ज्वलन एवं भगवान् धन्वन्तरि के पूजन के साथ किया गया।
इस नाटक के माध्यम से लोगों को यह संदेश दिया गया कि आयुर्वेद केवल मनुष्य के लिए नहीं बल्कि सम्पूर्ण पृथ्वी के कल्याण का मार्ग है। यह रोगमुक्ति के साथ-साथ स्वास्थ्य, संतुलन और आनन्दमय जीवन जीने की प्रेरणा देता है। आयुर्वेद आहार-विहार, योग-प्राणायाम और दिनचर्या के माध्यम से शरीर, मन और आत्मा तीनों का संतुलन स्थापित करता है। इस नाटक के माध्यम से देश वासियों को प्रेरणा दी गयी कि आयुर्वेद को केवल प्राचीन परम्परा न मानें बल्कि इसे आधुनिक जीवन की आवश्यकता के रूप में अपनायें।
इसके साथ-साथ वृद्धाश्रम ग्राम-विनायकपुर सिद्धपुर, चित्रकूट में ८० वृद्ध माता-पिता का स्वास्थ्य परीक्षण और नि:शुल्क औषधि वितरण किया गया। इस नि:शुल्क चिकित्सा शिविर का उद्घाटन पूर्व सांसद श्री आर०के० सिंह पटेल और श्री राकेश द्विवेदी ने किया। चिकित्सा शिविर में राष्ट्रीय आयु०गुरु आचार्य डॉ० मदनगोपाल वाजपेयी जी उनके सी०आर०ए०वी० शिष्य डॉ० अनुराधा कुमारी, डॉ० शोभना शर्मा, डॉ० कपिल कुमार, डॉ० रितिका सैनी ने रोग निदान, स्वास्थ्य परामर्श और औषधि वितरण किया। इस शिविर में वृद्धाश्रम के व्यवस्थापक रश्मि भरद्वाज तथा आयुष ग्राम चिकित्सालय के डॉ० वेदप्रताप वाजपेयी, डॉ० आशुतोष त्रिपाठी, नर्सिंग ऑफिसर बन्दना यादव, शीलू पाण्डेय, शालू सचान, फार्मासिस्ट राहुल कुमार, दीपक सोनी आदि रहे।
आचार्य वाजपेयी जी ने स्वस्थ रहने के लिए वृद्ध माता-पिताजनों को आहार-विहार, योग-प्राणायाम की सलाह दी।
10वें राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के उपलक्ष्य में भारत सरकार : आयुष मंत्रालय की आर०ए०वी० के निर्देशन में ‘‘आयुर्वेद जन-जन के लिए, पृथ्वी के कल्याण के लिए’’ इस उद्देश्य को सार्थक करने के उद्देश्य से आयुष ग्राम (ट्रस्ट) ।। आयुष ग्राम चिकित्सालय के संस्थापक आचार्य डॉ० मदनगोपाल वाजपेयी राष्ट्रीय गुरु भारत सरकार : आयुष मंत्रालय के नेतृत्व में आयुष ग्राम चिकित्सालय परिसर में वृक्षारोपण कार्यक्रम के अवसर पर ग्रहों के अनुसार नौ पौधों का रोपण कर ‘नवग्रह वाटिका’ की स्थापना किया गया। जिसका उद्घाटन जिला कृषि अधिकारी श्री आर०पी० शुक्ल जी द्वारा किया गया।
जिला कृषि अधिकारी श्री आर०पी० शुक्ल जी ने कहा कि देशभर में अस्पतालों, रोगों एवं रोगियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है लेकिन उसके मूल जड़ पर कोई ध्यान नहीं दे रहा कि आखिर रोगों एवं रोगियों की संख्या क्यों बढ़ती जा रही है। बीमारियों का मूल स्रोत आहार है, हम जो भी ग्रहण करते हैं उन्हीं से रोगों की उत्पत्ति होती है। साथ ही उन्होंने नवग्रह वाटिका में रोपित पौधों की औषधीय महत्त पर प्रकाश डालते हुए जानकारी दी।
आयुष ग्राम (ट्रस्ट) ।। आयुष ग्राम चिकित्सालय के संस्थापक आचार्य डॉ० मदनगोपाल वाजपेयी राष्ट्रीय गुरु भारत सरकार : आयुष मंत्रालय ने जिला कृषि अधिकारी जी का आभार प्रकट करते हुए कहा कि महर्षि चरक ने भी आहार को ही औषधि माना है। आहार का तात्पर्य हम जो भी ग्रहण करते हैं इन्द्रियों के माध्यम से।
कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह को सम्बोधित करते हुए आचार्य डॉ० वाजपेयी जी ने ऐसे निर्देशन के लिए रा०आ०वि० एवं आयुष मंत्रालय का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस कार्यक्रम में डॉ० वेदप्रताप वाजपेयी, डॉ० आशुतोष त्रिपाठी, सी०आर०ए०वी० के शिष्य/शिष्यायें डॉ० अनुराधा कुमारी, डॉ० शोभना शर्मा, डॉ० कपिल कुमार, डॉ० रितिका सैनी एवं आयुष ग्राम चिकित्सालय के आयुर्वेदिक नर्सिंग/फार्मेसी स्टॉफ, गुरुकुलम् के समस्त आचार्यगण एवं छात्र/छात्रायें आदि उपस्थित रहे।
इस नाटक के माध्यम से विद्यार्थियों ने संदेश दिया कि— आयुर्वेद केवल चिकित्सा पद्धति ही नहीं, बल्कि जीवन जीने की समग्र कला है। स्वस्थ दिनचर्या, संतुलित आहार, योग, प्राणायाम और औषधियाँ मिलकर मनुष्य को दीर्घायु एवं निरोग बनाती हैं। गुरुकुल के आचार्यों और छात्रों की इस प्रस्तुति को दर्शकों ने बहुत सराहा और आयुर्वेद के महत्व को समझने का संकल्प लिया।
10वें राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ भारत सरकार आयुष मंत्रालय के निर्देशन में आज दिनांक 18/09/2025 को आयुष ग्राम ट्रस्ट, चित्रकूट द्वारा विशेष निःशुल्क चिकित्सा शिविर एवं औषधि वितरण का आयोजन किया गया।
यह शिविर भागवत पीठ, चित्रकूट स्थित जगजीवन निवास आश्रम (ख़ोही) में आयोजित हुआ। इस अवसर पर आयोजन के प्रेरणास्रोत एवं आयुष ग्राम ट्रस्ट के संस्थापक पूज्य गुरुजी आचार्य डॉ. मदनगोपाल वाजपेयी जी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि चित्रकूट-बाँदा के भूतपूर्व यशस्वी सांसद आदरणीय भैरों प्रसाद मिश्र तथा भागवत पीठ, चित्रकूट के प्रसिद्ध कथावाचक आचार्य नवलेश दीक्षित, भागवत रत्न जी रहे।
शिविर में बड़ी संख्या में लोगों ने पहुँचकर निःशुल्क चिकित्सा परामर्श एवं औषधि वितरण का लाभ लिया। इस आयोजन का उद्देश्य जन-जन तक आयुर्वेद के अमूल्य संदेश को पहुँचाना और प्रत्येक मानव को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना है।
आगामी मुख्य आयोजन 23 सितम्बर 2025 को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस पर आयुष ग्राम चिकित्सालय, सूरजकुण्ड रोड (आयुष ग्राम मार्ग), चित्रकूटधाम (210205) में विशेष संगोष्ठी (सम्भाषा परिषद्) के रूप में होगा।
मिलकर संकल्प लें — “आयुर्वेद जन-जन के लिए, पृथ्वी के कल्याण के लिए।”
10वें आयुर्वेद दिवस के उपलक्ष्य पर राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ: आयुष मंत्रालय भारत सरकार के निर्देशन में आज आयुष ग्राम के संस्थापक एवं आर०ए०वी० आयुष मंत्रालय भारत सरकार के राष्ट्रीय गुरु आचार्य डॉ. मदनगोपाल वाजपेयी के नेतृत्व में प्रातः 8 बजे से चित्रकूट के बेड़ी पुलिया चौराहे से प्रयागराज रोड तक प्रत्येक मानव को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने एवं वैदिक चिकित्सा विज्ञान आयुर्वेद के उत्थान हेतु एक रैली का आयोजन किया गया। इस रैली का उद्घाटन माननीय कुलपति जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय, चित्रकूट (उप्र) एवं डॉ. सचिन उपाध्याय चिकित्साधिकारी द्वारा हरी झंडी दिखा कर किया गया। इस रैली में आयुष ग्राम गुरुकुलम के समस्त छात्रों/छात्राओं, आचार्यों, प्रधानाचार्य, आयुष ग्राम चिकित्सालय के चिकित्सकों, आर.ए.वी. शिष्यों डॉ. अनुराधा कुमारी, डॉ. शोभना शर्मा, डॉ. रितिका सैनी, डॉ. कपिल कुमार एवं चिकित्सालय के सभी नर्सिंग स्टाफ एवं फार्मासिस्टों ने उत्साह पूर्वक सहभागिता की।
रैली का उद्घाटन करते हुए कुलपति जी ने कहा कि आयुर्वेद ही विश्व को समग्र स्वास्थ्य प्रदान करने में सक्षम है और सम्पूर्ण विश्व आयुर्वेद की ओर निहार रहा है। उन्होंने यह कहा कि आचार्य डॉ० वाजपेयी आयुर्वेद के क्षेत्र में उत्तर भारत की एक पहचान हैं इसलिए हम उन्हें और उनके चारों शिष्यों को इस आयुर्वेद दिवस पर विश्वविद्यालय परिसर में सम्मानित करेंगे।
विश्वविद्यालय के चिकित्साधिकारी डॉ० सचिन उपाध्याय ने कहा कि आयुर्वेद का प्रचार-प्रसार करना उसके द्वारा मानव की सेवा करना इस पितृपक्ष में ऋषियों का सच्चा तर्पण है।
रैली का समापन आयुष ग्राम ट्रस्ट परिसर में किया गया। समापन के अवसर पर सभी सहभागियों को संबोधित करते हुए आचार्य डॉ. वाजपेयी ने कहा कि हम सभी का यह लक्ष्य होना चाहिए कि हम प्रत्येक मानव को उसके स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करें और जन जन तक आयुर्वेद को संदेश पहुंचाएँ। अपने इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए हम सप्ताह में दो दिन लोगों की निशुल्क चिकित्सा करते हैं जिसमें आए हुए रोगियों को नि:शुल्क चिकित्सा प्रदान की जाती है और आवश्यकतानुसार नि:शुल्क जांच भी उपलब्ध कराई जाती है।
साथ ही आयुष ग्राम में उपचार हेतु पधारे डॉ० शिवशंकर सोनी वरिष्ठ चिकित्साधिकारी (राजस्थान सरकार) ने भी संबोधित करते हुए कहा कि हम सब आयुर्वेद को विश्व पटल में पूर्ण रूपेण स्थापित करने को कृत संकल्पित हों और यही भारत की पहचान है। क्योंकि विश्व में भारत की विशिष्ट पहचान योग और आयुर्वेद से है।
आज दिनांक 28 अगस्त 2025 को पुलिस अधीक्षक, चित्रकूट के आमंत्रण पर आर टी सी पुलिस लाइन, चित्रकूट में प्रशिक्षणरत 449 नव नियुक्त आरक्षियों को भावनात्मक/मानसिक स्वास्थ्य की दृष्टिगत मानसिक स्वास्थ्य परामर्श दाता शिविर का आयोजन किया गया।
इस शिविर में मुख्य अतिथि के गण में आयुष ग्राम न्यास के संस्थापक आचार्य डॉ० मदन गोपाल वाजपेयी राष्ट्रीय गुरु आर०ए०वी० भारत सरकार : आयुष मंत्रालय का पुलिस लाइन के प्रतिरक्षा निरीक्षक श्री रामशीस यादव जी ने अंगवस्त्र, पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया। तत्पश्चात् आचार्य डॉ० वाजपेयी जी ने लगभग 2 घण्टे नवनियुक्त आरक्षियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि आरक्षी शब्द 'आ' उपसर्ग के साथ रक्षणे धातु से मिलकर आरक्षी शब्द बना है जिसका अर्थ होता है चतुर्दिक रूप के साथ रक्षा करना, समाज, राष्ट्र, परिवार व अपने दायित्व, कर्तव्य की उसके लिए आपको शारीरिक व ऐन्द्रिक रूप से हमेशा स्वस्थ रहना चाहिए। आयुर्वेद में जीवन को स्वस्थ रखने के लिए तीन स्तम्भ बताये गये हैं आहार, ब्रह्मचर्य और निद्रा। सर्वप्रथम आहार को शुद्ध रखना अन्नमय कोष से ही मनोमय कोष का निर्माण होता है। यहाँ तक गाँवों में भी लोग कहा करते थे कि जैसा खाओं अन्न, वैसा हो मन ।
इसीलिए आहार जो भी खाये बहुत सोच समझकर। फिर अपनी इन्द्रियाँ भी अपने वश में रखना चाहिए। इन्द्रियों को आप कभी भी चिरकाल तक संतुष्ट नहीं कर सकते ऐन्द्रिक सुख क्षणिक होता है इसीलिए हमें इन्द्रियों का गुलाम नही होना चाहिए।
अन्त में प्रतिरक्षा निरीक्षक ने आचार्य डॉ० वाजपेयी जी का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए आभार प्रकट किया तथा प्रशिक्षु आरक्षी से उनके द्वारा बताये मार्ग का अनुशरण करने की अपील की।
आयुष ग्राम (ट्रस्ट) के आयुष ग्राम चिकित्सालय, चित्रकूट में आयोजित द्विदिवसीय नि:शुल्क दन्त चिकित्सा शिविर का आज स्नेहपूर्ण वातावरण में समापन हुआ।
इस विशेष शिविर में राजकोट (गुजरात) के प्रसिद्ध आयुष दन्त चिकित्सक एवं भारत सरकार : आयुष मंत्रालय द्वारा नियुक्त राष्ट्रीय गुरु डॉ० जयसुख मकवाना जी ने अपनी सेवाएँ प्रदान कीं। शिविर के दोनों दिनों में लगभग 250 दन्त रोगियों का परामर्श एवं उपचार किया गया, जिनमें कई रोगियों के दाँत बिना इंजेक्शन, बिना दर्द और बिना पेनकिलर के आयुर्वेद पद्धति से निकाले गए।
समापन अवसर पर आयुष ग्राम चिकित्सालय का समस्त स्टाफ उपस्थित रहा। पूज्य गुरुजी आचार्य डॉ० मदनगोपाल वाजपेयी जी ने डॉ० मकवाना जी को भगवान श्रीराम जी की प्रतिमा, अंगवस्त्र व नारिकेल फल अर्पित कर सम्मानित किया तथा उनके योगदान के प्रति कृतज्ञता प्रकट की।
इस अवसर पर उपस्थित सभी ने माना कि आयुर्वेद की यह विलक्षण दन्त चिकित्सा विधा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायी है और इसे जन-जन तक पहुँचाने का कार्य सतत जारी रहना चाहिए।
आयुष ग्राम (ट्रस्ट) के आयुष ग्राम चिकित्सालय में दिनांक- 23 अगस्त 2025 दिन शनिवार को द्विदिवसीय नि:शुल्क दन्त चिकित्सा शिविर के प्रथम दिवस का उद्घाटन किया गया। शिविर का प्रारम्भ कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ० आशुतोष त्रिपाठी विशेष कार्य अधिकारी क्षेत्रीय आयुर्वेदिक यूनानी अधिकारी बाँदा तथा विशिष्ट अतिथि श्री अनन्तराम त्रिपाठी एडवोकेट हाईकोर्ट म०प्र० सचिव आयुष ग्राम (न्यास) एवं इस शिविर में अपनी सेवायें देने आये राजकोट (गुजरात) के प्रसिद्ध आयुष दन्त चिकित्सक और राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ भारत सरकार : आयुष मंत्रालय के राष्ट्रीय गुरु डॉ० जयसुख मकवाना के कर कमलों द्वारा दीप प्रज्जवलन एवं भगवान् धन्वन्तरि के वैदिक पूजन के साथ हुआ।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ० आशुतोष त्रिपाठी नोडल अधिकारी जी ने कहा कि अभी तक दाँतों की समस्या के लिए हमें जानकारी केवल एलोपैथ चिकित्सा एवं चिकित्सक बीडीएस तक ही सीमित थी लेकिन मैं सौभाग्यशाली हूँ कि आज आचार्य डॉ० मदनगोपाल वाजपेयी जी के सानिध्य में मुझे आयुर्वेद की इस प्राचीन विधा एवं ज्ञान को अपनी आँखों से देखने एवं समझने का अवसर मिला।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि श्री अनन्तराम त्रिपाठी जी ने आचार्य डॉ० वाजपेयी जी के आयुर्वेद के क्षेत्र में सतत् यात्रा एवं बलिदान तथा उनके द्वारा अर्जित उपलब्धियों का संक्षेप में वर्णन किया।
शिविर के याज्ञिक के रूप में उपस्थित दन्त विशेषज्ञ तथा राष्ट्रीय गुरु भारत सरकार : आयुष मंत्रालय डॉ० जयसुख मकवाना जी ने बताया कि दुर्भाग्य है कि भारत के बहुत ही कम लोग इस विधा को जानते हैं कि आयुर्वेद में बिना इंजेक्शन, बिना पेन किलर के भी दाँत उखाड़ने व दन्त से सम्बन्धित चिकित्सा की जाती है। इस विधा को जीवन्त बनाये रखने के उद्देश्य से हम अपनी टीम के साथ भारत के अनेक राज्यों में अभी तक लगभग १३ राज्यों में नि:शुल्क शिविर के माध्यम से लाखों दाँत रोगों से पीड़ितों की सेवा करते हैं तथा अपनी आयुर्वेद विधा को प्रकाशित करते हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे आचार्य डॉ० मदनगोपाल वाजपेयी राष्ट्रीय गुरु भारत सरकार : आयुष मंत्रालय ने बताया कि अष्टांग आयुर्वेद में ऊर्ध्वांग चिकित्सा के अन्तर्गत डेंसिस्टी चिकित्सा होती है। साथ ही उन्होंने कहा कि आज से २०० साल पहले आयुर्वेद चिकित्सा ही हमारे भारत में प्रचलित थी इसके द्वारा ही सभी रोगों का इलाज किया जाता था जिसे आजादी के लगभग ७९ सालों बाद भी आयुर्वेद को अपने मूल रूप में वापस लाने के लिए यह सरकार कार्य कर रही है। भारत सरकार ने दंत रोग में डॉ० मकवाना जी को राष्ट्रीय गुरु नियुक्त कर देश के डॉक्टर्स को दंत रोग में प्रशिक्षित करने का दायित्व दिया है, जिससे इस विधा का प्रचार-प्रासर हो।
शिविर के प्रथम दिवस में दन्त रोग से पीड़ित लगभग ११० लोगों का निदान किया गया। साथ ही डॉ० मकवाना जी ने हॉल में सभी रोगियों की उपस्थित में ही आयुर्वेद के जालन्धर बन्ध द्वारा बिना इंजेक्शन, बिना दर्द के कई रोगियों के दाँत उखाड़कर सब को चकित कर दिया।
आयोजकों ने बताया कि दन्त चिकित्सा का शिविर दूसरे दिन भी २४ अगस्त २०२५ को दिन रविवार प्रात: ९ बजे से सायं ४ बजे तक जारी रहेगी।
प्रथम दिवस के कार्यक्रम में वैद्य द्वारिका प्रसाद गुप्त, श्री रामबहादुर त्रिपाठी नरैनी, श्री श्याम प्रकाश शुक्ल पन्ना, श्री राकेश द्विवेदी, संस्था के प्रबन्धक श्री बाल्मीकि द्विवेदी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री आलोक पाल, चिकित्साधिकारी डॉ० वेदप्रताप वाजपेयी, डॉ० आशुतोष त्रिपाठी, श्री अनुराग वाजपेयी, आर०ए०वी० के शिष्य शिष्यायें डॉ० अुनराधा कुमारी, डॉ० शोभना शर्मा, डॉ० रितिका सैनी, डॉ० कपिल कुमार तथा आयुष ग्राम के सभी चिकित्सक, उपचारिकायें, फार्मेसिस्ट और अन्य स्टॉफ उपस्थित रहे।
15 अगस्त केवल एक तिथि नहीं, यह हमारी आज़ादी, त्याग, बलिदान और राष्ट्र के प्रति अटूट प्रेम का प्रतीक है। आज हमारी संस्था "आयुष ग्राम ट्रस्ट" (जिसके अंतर्गत आयुष ग्राम चिकित्सालय और आयुष ग्राम गुरुकुलम दोनों संचालित हैं), चित्रकूट, उत्तर प्रदेश में 79वाँ स्वतंत्रता दिवस समारोह बड़े ही हर्षोल्लास और देशभक्ति की भावना के साथ मनाया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत ध्वजारोहण के साथ हुई, तत्पश्चात मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन कर वन्दना के साथ उत्सव का शुभारंभ किया गया।
आज के इस विशेष अवसर पर मुख्य अतिथियों में - आयुष ग्राम गुरुकुलम के अध्यक्ष परम पूज्य आचार्य श्री माता प्रसाद शुक्ल (पूर्व प्राचार्य), आयुष ग्राम ट्रस्ट के संस्थापक परम पूज्य आचार्य डॉ. मदन गोपाल वाजपेयी, राष्ट्रीय आयु०वि० गुरु आयुष मंत्रालय, भारत सरकार: (पूर्व उपाध्यक्ष: भारतीय चिकित्सा परिषद, उ.प्र. शासन), विराजमान रहे।
कार्यक्रम में गुरुकुल के विद्यार्थियों ने देशभक्ति से ओत-प्रोत रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं, जिनमें गीत, नृत्य और कविताएँ शामिल रहीं। चिकित्सालय स्टाफ की तरफ से कई प्रस्तुतियां दी गई, विचार व्यक्त किए गए, राष्ट्रीय गीत गाए गए।
पूज्य आचार्य श्री माता प्रसाद शुक्ल जी ने संस्कृत भाषा में प्रेरणादायक उद्बोधन दिया। अंत में, सांस्कृतिक प्रमुख पूज्य आचार्य डॉ. मदन गोपाल वाजपेयी जी ने स्वतंत्रता दिवस के महत्व पर विशेष विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम के व्यवस्थापक और निरिक्षण में श्री बाल्मीकि द्धिवेदी (प्रबन्धक), श्री आलोक कुमार (कार्यपालन अधिकारी), डॉ. वेद प्रताप वाजपेयी, अनुराग वाजपेयी और सीमा विश्वकर्मा (प्रधानाचार्य) रहे।
कार्यक्रम परिसर साधना कुटीर की स्वच्छता एवं मंच सजावट का कार्य प्रधानाचार्य और आचार्य राजपूत जी के निर्देशन में किया गया। आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने का दायित्व श्री रवि भैया द्वारा निभाया गया। कार्यक्रम में अन्य सहयोगी आचार्य श्री भानु प्रताप बाजपेयी जी, आचार्य श्री शिवसागर जी, गुरुकुल के वरिष्ठ आचार्य श्री शुक्ल जी, आचार्य आलोक बाजपेयी जी रहे। मिडिया और प्रचार प्रसार का दायित्व ज्ञान प्रताप जी के ऊपर रहा। आज के इस कार्यक्रम का संचालन श्रीमती गीतांजलि राय ने किया। आयुष ग्राम चिकित्सालय परिवार एवं गुरुकुलम परिवार के सभी स्टाफ मेंबर, सभी आचार्यगण, बच्चे उपस्थित रहे।
मानव जीवन में अज्ञानता, पाप और नकारात्मक कर्मों के कारण दुख और कष्ट उत्पन्न होते हैं। इनसे मुक्ति के लिए हमारे ऋषियों, महर्षियों एवं विद्वानों ने कई विधियाँ बताई हैं, जिनमें से एक प्रमुख है श्रावणी उपाकर्म। यह पवित्र अनुष्ठान जीवन में तेज, बल, बुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है तथा पाप, दोष और दुर्भावनाओं को दूर करता है।
धन्वंतरि पीठ आयुष ग्राम ट्रस्ट द्वारा पिछले कई वर्षों से यह आयोजन निरंतर किया जा रहा है, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु सम्मिलित होते हैं। आज का विशेष आयोजन इस वर्ष भी श्रावणी शुक्ल पूर्णिमा, शनिवार 9 अगस्त 2025 को, आयुष बिहारी, प्रभु राम और आयुष ग्रामेश्वर महादेव एवं भगवान धन्वंतरि की पवित्र उपस्थिति में कार्यक्रम संपन्न हुआ।
अनुष्ठान में सम्मिलित रहे - दशविध स्नान, प्रायश्चित्त स्नान, पंचगव्य पान, भस्मधारण एवं मृत्तिका स्नान, विप्र तर्पण, ऋषि तर्पण, देव पूजा, वेद मंत्रोच्चार एवं वैदिक पुराणों का पाठ। इन सभी क्रियाओं के माध्यम से आध्यात्मिक, मानसिक और शारीरिक शुद्धि प्राप्त होती है।
श्रावणी उपाकर्म को शास्त्रों में आरोग्य कारक, पापनाशक, पितृदोष नाशक एवं ज्ञानवर्धक बताया गया है। यह अनुष्ठान - पाप और दुर्भावनाओं को नष्ट करता है। जीवन में तेज, बल और बुद्धि का विकास करता है। मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता पूज्य आचार्य: डॉ. मदन गोपाल वाजपेयी (अध्यक्ष, आयुष ग्राम ट्रस्ट, चित्रकूट) जी ने की। अतिथियों में श्री राम बहादुर त्रिपाठी (वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पूर्व प्रबंधक, आयुष ग्राम गुरुकुलम), श्री पुष्पेंद्र अरजरिया, श्री राजेंद्र त्रिवेदी जी (जिलाध्यक्ष विश्व हिंदू परिषद, चित्रकूट), श्री राकेश द्विवेदी, श्री राजेंद्र द्विवेदी, ओरन, डॉ० विष्णु शर्मा राजस्थान
इस अवसर पर आयुष ग्राम चिकित्सालय का स्टाफ, गुरुकुल के आचार्य एवं विद्यार्थीगण भावपूर्ण सहभागिता के साथ उपस्थित रहें।
आयुष ग्राम ट्रस्ट के संस्थापक एवं भारत सरकार द्वारा नियुक्त राष्ट्रीय आयुर्वेद गुरु आचार्य डॉ. मदन गोपाल वाजपेयी जी के निर्देशन व मार्गदर्शन में महर्षि चरक जन्मोत्सव का द्विदिवसीय समारोह भव्य रूप से संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य संदीप मिश्र (वेदाचार्य) द्वारा महर्षि चरक के विधिवत पूजन से हुआ। इस अवसर पर उपस्थित रहे: डॉ. वेद प्रताप वाजपेयी, डॉ. आशुतोष त्रिपाठी, डॉ. शोभना शर्मा, डॉ. अनुराधा, डॉ. रितिका, डॉ. कपिल कुमार, श्री बाल्मीकि द्विवेदी (प्रबंधक), श्री आलोक पाल (कार्यपालन अधिकारी)साथ ही, आयुष ग्राम चिकित्सालय के समस्त नर्सिंग स्टाफ, फार्मेसिस्ट,आयुष ग्राम गुरुकुलम के आचार्य एवं बटुकगण भी इस पूजन में उपस्थित रहे। पूजन के उपरांत चरक संहिता के सम्पूर्ण पाठ का आरंभ आयुष ग्राम गुरुकुलम के बटुकों द्वारा आचार्य संदीप मिश्र के नेतृत्व में किया गया।
समारोह का समापन पूज्य गुरुदेव आचार्य डॉ. मदन गोपाल वाजपेयी जी के प्रेरणादायी उद्बोधन के साथ हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता: पूज्य गुरुदेव आचार्य डॉ. मदन गोपाल वाजपेयी जी ने की। मुख्य अतिथि: डॉ. सीताराम गुप्ता, वरिष्ठ चिकित्सक, कर्वी, डॉ. महेश गुप्ता, पूर्व चिकित्साधिकारी, राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय, अतर्रा, श्री राम बहादुर त्रिपाठी, वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पूर्व प्रबंधक, आयुष ग्राम गुरुकुल, श्री अनंतराम त्रिपाठी, सचिव, आयुष ग्राम ट्रस्ट, श्री राकेश द्विवेदी।
इस अवसर पर आयुष ग्राम चिकित्सालय का समस्त स्टाफ, गुरुकुल के आचार्य एवं विद्यार्थीगण भावपूर्ण सहभागिता के साथ उपस्थित रहे।
जिसके शुभारंभ का पूजन आयुष ग्राम (न्यास) के सरल हृदय सेवक श्री दुबे जी(दूध वितरक) राधेश्याम दुबे जी ने किया। हमारे गुरु जी सरल सहज समर्पित भक्ति भाव युक्त सेवकों को बहुत महत्व देते हैं।वे एक भक्ति और समर्पण का नाता मानते हैं। इसका उदाहरण आज नए ओपीडी भवन के शुभारंभ पूजन के अवसर पर स्पष्ट दिखा और हमेशा दिखता है।
आज से ओपीडी की सभी सेवाएँ इसी नई और सुव्यवस्थित भवन में उपलब्ध होंगी। पूज्य गुरुदेव के सान्निध्य, आशीर्वाद और आयुष बिहारी प्रभु राम जी तथा संजीवनी गिरधारी हनुमान जी की कृपा से यह नवीन व्यवस्था रोगियों की सेवा को और अधिक सहज, सुलभ और व्यवस्थित बनाएगी।
“गुरु पूर्णिमा वह अवसर है जब शिष्य अपने जीवन की दिशा के लिए गुरु के चरणों में कृतज्ञता प्रकट करता है।” आयुष ग्राम (न्यास), चित्रकूट में आयोजित गुरु पूर्णिमा 2025 का पर्व अत्यंत भव्य, भक्तिमय और आध्यात्मिक गरिमा से परिपूर्ण रहा। पूज्य गुरुदेव आचार्य डॉ. वाजपेयी जी के सान्निध्य में यह आयोजन संपूर्ण गुरु-शिष्य परंपरा की जीवंत अनुभूति बन गया। कार्यक्रम का शुभारंभ गुरुदेव द्वारा अपने गुरुचरणों के चित्रों की पूजा से हुआ। तदुपरांत पूज्य गुरुदेव का पूजन श्रद्धाभाव से गुरुकुल के आचार्यगण एवं छात्रों द्वारा किया गया, जिसमें तिलक, माल्यार्पण एवं वंदना समर्पित की गई।
पूजन उपरांत कई शिष्य-शिष्याओं ने मंच पर आकर अपने आध्यात्मिक जीवन में गुरुजी के सान्निध्य से आए परिवर्तनों को साझा किया। भावुक अनुभवों ने सभी को भावविभोर कर दिया। इस अवसर पर पूज्य गुरुदेव ने गहन आत्मिक मार्गदर्शन प्रदान किया। उनके उद्बोधन व आशीर्वचनों से उपस्थित साधक समुदाय लाभान्वित हुआ। कार्यक्रम का समापन गुरु आरती व प्रसाद वितरण के साथ हुआ। भक्तों एवं आगंतुकों के लिए दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक भंडारे की उत्तम व्यवस्था रही। यह आयोजन केवल एक परंपरा नहीं, एक आध्यात्मिक चेतना का जागरण था। गुरु और शिष्य के पवित्र संबंध की ऊँचाई को यह आयोजन अनुभव कराने में सफल रहा।
इस आयोजन की व्यवस्था और संचालन की देखरेख में श्री बाल्मीकि द्धिवेदी (प्रबन्धक), श्री आलोक कुमार (कार्यपालन अधिकारी), सीमा विश्वकर्मा (प्रधानाचार्य), अनुराग वाजपेयी जी, मुख्य आचार्य डॉ. भानुप्रताप वाजपेयी, आचार्य शिवसागर राजपूत सिंह, डॉ. आशुतोष त्रिपाठी जी सक्रिय रहे। कार्यक्रम परिसर साधना कुटीर की स्वच्छता एवं मंच सजावट का कार्य प्रधानाचार्य, आचार्य राजपूत जी के निर्देशन में किया गया। आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने का दायित्व श्री रवि भैया द्वारा निभाया गया भंडारा व्यवस्था का कार्य श्री ललित पाठक, श्री मिश्र जी, श्री रामकृष्ण मिश्र, यादव जी, पंचकर्म विभाग, फार्मेसी विभाग, गुरुकुल विभाग के समस्त सदस्यों व मुन्ना, ओमप्रकाश के सहयोग से सम्पन्न हुआ। हवन एवं पूजन व्यवस्था का नेतृत्व मुख्य वेदाचार्य श्री संदीप मिश्र जी ने किया। भजन प्रस्तुति गुरुकुल संगीत विभाग एवं कलाकारों द्वारा हुई। प्रचार-प्रसार व मीडिया कवरेज का दायित्व ज्ञान प्रताप जी ने निर्वहन किया। कार्यक्रम का संचालन अत्यंत भावपूर्ण ढंग से डॉ. वेद वाजपेयी जी ने किया। पूरे आयोजन में आयुष ग्राम चिकित्सालय परिवार, गुरुकुलम विभाग, समस्त आचार्यगण, विद्यार्थीगण एवं सेवाभावी सहयोगियों की उपस्थिति व सेवा रही।
शुभ संवत् 2082 ज्येष्ठ शुक्ल द्वादशी रविवार 8 जून 2025 को आयुष ग्राम गुरुकुलम् (आयुष ग्राम न्यास चित्रकूट धाम, उ०प्र०) के पावन परिसर में, वैदिक परंपरा एवं शास्त्र सम्मत विधि-विधान से सम्पन्न हुआ सामूहिक उपनयन संस्कार, जहाँ ब्रह्मचर्य जीवन का शुभारंभ हुआ वैदिक मंत्रों की दिव्यता और गुरुकुल की गरिमा के साथ।
इस आयोजन में सर्वप्रथम वैदिक परंपरा एवं शास्त्र संवत् विधि विधान से बटुकों का उपनयन संस्कार हुआ। पूज्य गुरुजी आचार्य डॉ० मदनगोपाल वाजपेयी जी द्वारा सभी बटुकों को गुरु मंत्र दिया गया। इसके पश्चात पूज्य गुरुजी का उद्बोधन, विशिष्ट अतिथियों का उद्बोधन और अंत में भोजन प्रसाद के साथ कार्यक्रम की समाप्ति हुई।
इन महान विभूतियों ने अपने उद्बोधनों से उपस्थितजनों को वैदिक ज्ञान, ब्रह्मचर्य धर्म और जीवन के आदर्शों से अभिभूत किया।
पूरे कार्यक्रम का संचालन, व्यवस्था एवं श्रमदान गुरुकुल परिवार, शिक्षकों, आचार्यों, सेवाभाव से जुड़े विद्यार्थियों एवं समस्त आयुष ग्राम परिवार ने उत्कृष्ट रूप से किया।
यह आयोजन न केवल एक संस्कार था, अपितु एक जीवन मूल्यों से युक्त दिशा की ओर पहला कदम था।
सभी सहयोगियों, सहभागी परिवारों व उपस्थित अतिथियों को हृदय से धन्यवाद!
आयुष ग्राम ट्रस्ट परिवार की ओर से सादर कृतज्ञता।
हमारे पूज्य गुरुजी आचार्य डॉ. मदन गोपाल वाजपेयी जी को राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ (भारत सरकार, आयुष मंत्रालय) की ओर से गुरु–शिष्य परंपरा अंतर्गत विशेष शिक्षण एवं प्रशिक्षण हेतु अब तक चार आयुर्वेद डॉक्टर शिष्य प्राप्त हुए हैं। इनमें से तीन शिष्य पूर्व में गुरुशरण में आ चुके हैं और अब चौथी शिष्या डॉ. रितिका सैनी का शुभागमन हुआ। इस शुभ अवसर पर उनका शिष्योपनयन संस्कार एवं संकल्प ग्रहण कार्यक्रम अत्यंत गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। डॉ. रितिका सैनी ने इस अवसर पर गुरु परंपरा से विधिवत् जुड़कर आयुर्वेद साधना, शास्त्र-अनुशासन और सेवा का संकल्प लिया। यह समारोह एक ऐसी परंपरा का प्रतीक है जो केवल ज्ञान का हस्तांतरण नहीं, बल्कि तप, साधना और समर्पण की संपूर्ण प्रक्रिया है।
इस प्रयास के प्रवाहक आयुष सचिव वैद्य राजेश कोटेचा, राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ अध्यक्ष वैद्य देवेंद्र त्रिगुणा, निदेशक डॉ. वंदना सिरोहा तथा प्रशासनिक अधिकारी नागार्जुन रामाकृष्णन का हम हृदय से आभार प्रकट करते हैं, जिनके सहयोग से यह गुरु–शिष्य परंपरा जीवंत हो रही है।
इस अवसर पर डॉ. आशुतोष त्रिपाठी, कार्यपालन अधिकारी श्री आलोक कुमार, समस्त आयुष ग्राम चिकित्सालय परिवार, गुरुकुलम परिवार, सभी आचार्यगण, बच्चे, डॉक्टर, नर्स, उपचारिकाएं एवं स्टाफ साक्षी बने। यह कार्यक्रम न केवल गुरु–शिष्य परंपरा की पुनः प्रतिष्ठा है, बल्कि आयुर्वेद के भावी आचार्यों के निर्माण की दिशा में एक ऐतिहासिक अध्याय है।
आज विक्रम संवत 2082 वैशाख शुक्ल पंचमी शुक्रवार 2 मई 2025 को आयुष ग्राम (न्यास) परिसर महर्षि चरक तपोवन (साधना कुटीर) चित्रकूट धाम (उ०प्र०) में आद्य जगद्गुरु शंकराचार्य जयंती और इसी पुण्यतिथि पर अवतरित आचार्य डॉ० मदन गोपाल वाजपेयी जी का जन्मोत्सव हर्षोल्लास और सनातन परंपरा से मनाया गया।
आज के इस आयोजन में सर्वप्रथम संगीतमय अखण्ड रामचरितमानस परायण, आयुष ग्रामेश्वर महादेव रुद्राभिषेक, आयुष विहारी प्रभु श्री राम मंदिर दरबार मन्दिर में 56 भोग प्रसाद, आद्य जगद्गुरु शंकराचार्य जयंती पूजन तत्पश्चात पूज्य गुरु जी के शिष्यों द्वारा पूज्य गुरु जी का पूजन और फिर पूज्य गुरु जी के द्वारा उद्बोधन एवं आशीर्वचन और अंत में भोजन प्रसाद के साथ इस कार्यक्रम की समाप्ति हुयी।
आज के इस कार्यक्रम में अतिथियों की श्रृंखला में श्री पुष्पेंद्र अरजरिया (अरजरिया मार्वल हॉउस, झाँसी), श्री चंद्रमौलि मिश्र (शिक्षा विभाग) कोषाध्यक्ष आयुष ग्राम न्यास, श्री गुरुदत्त मिश्रा (गौरिहार), डॉ. रजनीश आलोनकर (छिंदवाड़ा, म०प्र०), डॉ. अवध विहारी द्धिवेदी (पूर्व आयुर्वेदिक क्षे०यू० अधिकारी), श्री रामबहादुर त्रिपाठी (पूर्व प्रबंधक आयुष ग्राम गुरुकुलम), श्री श्याम शुक्ला (पन्ना), डॉ. विष्णुकांत त्रिपाठी, श्री अनंतराम त्रिपाठी (एडवोकेट), श्री बिमल मिश्रा (ऊमा आयुर्वेदिक), श्री राजीव गुप्ता (डाबर), डॉ. विष्णु शर्मा (सीकर, राजस्थान), गुरु शिष्य परंपरा के तहत राष्ट्रीय आयु०वि० आयुष मंत्रालय भारत सरकार द्वारा भेजें गए शिष्य डॉ. शोभना और डॉ. कपिल भी उपस्थित रहें।
कार्यक्रम की अध्यक्षता पूज्य गुरुदेव आचार्य डॉ. मदनगोपाल वाजपेयी जी ने की, कार्यक्रम के व्यवस्थापक और निरिक्षण में श्री बाल्मीकि द्धिवेदी (प्रबन्धक), श्री आलोक कुमार (कार्यपालन अधिकारी), डॉ. वेद प्रताप वाजपेयी और सीमा विश्वकर्मा (प्रधानाचार्य) रहे। कार्यक्रम में अन्य सहयोगी शिवम त्रिपाठी, श्री बृजभूषण शुक्ला, श्री ललित पाठक, श्री रवि तिवारी, श्री कृष्ण कुमार मिश्र, आचार्य श्री शिवसागर जी, श्री क्षितिज अग्रवाल, श्रीमती शीलू पाण्डेय, नेहा सिंह, शालू, रेवती, राखी, किरन, नेहा आदि रहें। मिडिया और प्रचार प्रसार का दायित्व ज्ञान प्रताप जी के ऊपर रहा। कार्यक्रम का संचालन आचार्य भानुप्रताप वाजपेयी जी ने किया। आयुष ग्राम चिकित्सालय परिवार एवं गुरुकुलम परिवार के सभी स्टाफ मेंबर, सभी आचार्यगण, बच्चे उपस्थित रहे।
दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ के 28वें दीक्षांत और शिष्योपनयन संस्कार समारोह से हमारे पूज्य गुरुजी के वापस लौटने पर संस्था द्वारा गुरू जी का हर्षोल्लास के साथ स्वागत किया गया। संस्था में सभी अधिकारी, कर्मचारियों ने गुरु जी को पुष्प, अंगवस्त्र अर्पित कर आशीर्वाद लिया।
आज होली के पावन पर्व पर "आयुष ग्राम ट्रस्ट" चित्रकूट, उत्तर प्रदेश में पूज्य गुरुजी आचार्य डॉ मदन गोपाल वाजपेयी (राष्ट्रीय आयु० वि० गुरु: भारत सरकार आयुष मंत्रालय) जी के सानिध्य में संस्था के सभी कार्यकर्ता बंधुओं संग हर्ष और उल्लास से रंगों का उत्सव मनाया गया साथ ही सभी लोगों ने गुरु जी को पुष्प/गुलाल अर्पित कर आशीर्वाद लिया।
कार्यक्रम में पूज्य गुरु जी के साथ साथ श्री राम बहादुर त्रिपाठी (एडवोकेट), डॉ राम सलाही द्विवेदी जी, जयदेव संस्कृत कॉलेज के प्राचार्य मनोज कुमार द्विवेदी जी एवं अध्यापक विजय कुमार पयासी जी तथा समस्त गुरुकुलम एवं चिकित्सालय परिवार उपस्थित रहा।
आपसी प्रेम, सौहार्द और एकता के रंगों में सराबोर करने वाला यह त्योहार हमारे जीवन में समरसता और सद्भाव के रंग घोलता है।
आप सभी को होली की मंगलमय शुभकामनाएँ!
देवाधिदेव महादेव की उपासना के पावन महापर्व महाशिवरात्रि के पुण्य अवसर पर आयुष ग्राम ट्रस्ट में श्री आयुषग्रामेश्वर महादेव का विधि विधान से चार प्रहर का पूजन जिसमें प्रथम प्रहर का पूजन अभिषेक गन्ने के रस से, द्वितीय प्रहर का पूजन अभिषेक गंगाजल से, तृतीय प्रहर का पूजन अभिषेक कुशोदक से तथा चतुर्थ प्रहर का पूजन अभिषेक गोदुग्ध से हुआ।
पश्चात 27 फरवरी 2025 को प्रातः हवन, महाआरती, प्रसाद वितरण और भण्डारा।
हर हर महादेव! भगवान तीर्थराज सभी की मनोकामनाएं पूर्ण करें।
परब्रह्म स्वरूप सद्गुरु भगवान् की महान् कृपा से आज आठवां पुरश्चरण संपूर्ण हुआ और इस उपलक्ष्य में आयुष विहारी प्रभु श्री राम मन्दिर ( आयुष ग्राम ट्रस्ट चित्रकूट) में पूज्य गुरु भगवान् आचार्य श्री माता प्रसाद शुक्ल जी एवं पूज्य आचार्य डॉ मदन गोपाल वाजपेयी जी के संरक्षण में अपने सभी परिकरों सहित १५ कुंडीय हवन यज्ञ कर इस महानुष्ठान की पूर्णाहुति हुई। इस अद्भुत कार्यक्रम की कुछ झलकियां प्रस्तुत हैं।
आज दिनांक 06/02/2025 को आयुष ग्राम (ट्रस्ट) चित्रकूट परिसर में डॉ0अरुण कुमार सिंह पुलिस अधीक्षक चित्रकूटधाम (उ. प्र.) की महनीय उपस्थिति हुई। आचार्य डॉ0 मदन गोपाल वाजपेयी ने अपनी ओपीडी में पुलिस अधीक्षक डॉ0 सिंह को राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित होने के उपलक्ष में फूलमाला अंगवस्त्र, नारियल फल एवं श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण भेंट कर सम्मानित किया।
आचार्य डॉ वाजपेयी व पुलिस अधीक्षक के मध्य लगभग सवा घंटे की वार्ता में आयुर्वेद, शिक्षा, संस्कृत, संस्कृति, धर्म, अध्यात्म, साधना, संस्कार और नव युवाओं की दशा के विषय में विस्तृत चर्चा हुयी। तत्पश्चात् पुलिस अधीक्षक महोदय ने आयुष ग्राम परिसर में स्थापित धन्वंतरि गोसेवालय में गोमाताओं को गुड़ खिलाकर दर्शन कर राष्ट्र के उत्तरोत्तर विकास की कामना की और आयुष ग्राम के सभी प्रकल्पों के बिना किसी अनुदान, चंदा, दान के कुशलता पूर्वक संचालित होने पर प्रसन्नता व्यक्त की।
26 जनवरी बस एक तारीख नहीं, हमारे देश की लोकतांत्रिक शक्ति, एकता और संविधान की महिमा का प्रतीक है और आज हमारी संस्था "आयुष ग्राम ट्रस्ट" (जिसके अंतर्गत आयुष ग्राम चिकित्सालय और आयुष ग्राम गुरुकुलम दोनों स्थापित हैं) चित्रकूट, उत्तर प्रदेश में 76वां गणतंत्र दिवस समारोह बड़े ही हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। आज के कार्यक्रम की शुरुआत में ध्वजारोहण तत्पश्चात इस कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण व दीप प्रज्वलित कर वन्दना के साथ किया गया।
आज के इस कार्यक्रम में अतिथियों की श्रृंखला में आयुष ग्राम गुरुकुलम के अध्यक्ष पूज्य आचार्य श्री माता प्रसाद शुक्ल (पूर्व प्राचार्य), आयुष ग्राम ट्रस्ट के संस्थापक पूज्य आचार्य डॉ मदन गोपाल वाजपेयी (पूर्व उपाध्यक्ष: भारतीय चिकित्सा परिषद, उ.प्र. शासन), वरिष्ठ पत्रकार श्री संदीप शुक्ला जी, विश्व हिंदू परिषद के चित्रकूट जिलाअध्यक्ष श्री राजेंद्र त्रिवेदी जी, चिकित्सालय परिवार एवं गुरुकुलम परिवार के सभी स्टाफ मेंबर, सभी आचार्यगण, बच्चे उपस्थित रहे। आयुष ग्राम गुरुकुलम की प्रधानाचार्य श्रीमती सीमा जी ने आये हुए अतिथियों का स्वागत अभिनन्दन व परिचय कराया। कार्यक्रम में देववाणी संस्कृत भाषा में पूज्य आचार्य श्री माता प्रसाद शुक्ल जी ने अपने अंदाज में वक्तव्य दिया इसके बाद कुम्भ में गुरुकुल के बच्चों ने शानदार मंचन किया, बच्चों के अन्य कार्यक्रम तत्पश्चात सांस्कृतिक प्रमुख पूज्य आचार्य डॉ मदन गोपाल वाजपेयी जी ने गणतंत्र दिवस पर विशेष विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन आचार्य भानुप्रताप वाजपेयी जी ने किया। कार्यक्रम की समाप्ति राष्ट्रगीत के साथ हुई।
चित्रकूट। आयुष ग्राम, सूरजकुण्ड में आयुष विहारी प्रभु श्रीराम जी के प्राण प्रतिष्ठा का प्रथम वार्षिक महोत्सव शनिवार को बहुत ही हर्षोल्लास तथा वैदिक विधि-विधान से आयोजित किया गया। इस अवसर पर गुरुप्रपन्नदास महाराज खजुरीतालधाम, सतना द्वारा रामकथा का प्रवचन किया गया।
कार्यक्रम में संत रविशंकर महाराज, रावतपुरा सरकार, प्रधान आचार्य अनन्त श्री विभूषित, आचार्य माता प्रसाद शुक्ल, आचार्य डॉ. मदनगोपाल वाजपेयी, यज्ञाचार्य भूपेन्द्र पाण्डेय, यजमान डॉ. अवध विहारी द्विवेदी, पूर्व क्षे. आयुष अधिकारी चन्द्रमौलि मिश्र रहे।
दिनांक 30 नवंबर 2024 को विश्वकर्मा आडिटोरियम, लखनऊ विश्वविद्यालय में योग एवं वैकल्पिक चिकित्सा संकाय, लखनऊ विश्वविद्यालय, इंडियन योग फेडरेशन एवं उ.प्र. नेचुरोपैथी एंड योगा टीचर्स एंड फिजीशियन एसोसिएशन द्वारा मांसपेशीय तंत्र पर योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा का प्रभाव विषयक राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया।
इस राष्ट्रीय सेमिनार में आयुष ग्राम, चित्रकूट के संस्थापक अध्यक्ष आचार्य डॉ मदन गोपाल वाजपेयी को गत तीस वर्षों चिकित्सा पल्लव के प्रकाशन, 3000 से अधिक लेख लिखने अभी तक 2 लाख से अधिक रोगियों को भारतीय चिकित्सा पद्धति से स्वास्थ्य प्रदान करने तथा कई पुस्तकें लिखने जैसे योगदान के उपलक्ष्य में कुलपति भारतखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय द्वारा आजीवन परिलब्धि पुरस्कार से सम्मानित किया गया तथा उपकुलपति लखनऊ विश्वविद्यालय द्वारा स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र प्रदान किया गया।