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आयुष का यह नया सूर्योदय!!

दिल्ली हाईकोर्ट का यह आदेश कि आयुष मंत्रालय भारत सरकार आयुष पद्धति को आयुष्मान भारत योजना (PMJAY) में शामिल करने हेतु शीघ्र निर्णय लें और भारत सरकार इस याचिका को ही प्रत्यावेदन के रूप स्वीकारे तथा इसका निस्तारण तर्क संगत आदेश द्वारा करें।

यह आदेश सच में आयुष का नया सूर्योदय कहा जा सकता है केवल आयुष का ही नहीं बल्कि देशवासियों, गरीबी रेखा (Below Poverty Line) से नीचे जीवन यापन करने वालों का भी सूर्योदय है।

अब गेंद आयुष मंत्रालय के पाले में

आप जानते हैं कि गरीबी रेखा के नीचे की श्रेणी जिनकी आय २.४ लाख रुपये से कम है उन्हें सरकार द्वारा ‘आयुष्मान् योजना’ की सुविधा प्राप्त है। इस योजना के हितग्राही परिवार को ५ लाख रुपये का सलाना इलाज सम्बद्ध निजी एवं सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध है। इसमें एपेन्डिक्स, मलेरिया, हार्निया, बवासीर, हाइड्रोसील, नसबन्दी, डिसेन्ट्री, एचआईवी, मोतियाबिन्द, पेट दर्द, मूत्र संक्रमण, टायफाइड आदि रोगों का इलाज शामिल हैं।

भाव प्रकाशकार दिनचर्या प्रकरण में स्पष्ट कहते हैं कि

‘जिस देश में जो प्राणी पैदा होता है उसके लिए उसी देश में उत्पन्न औषधियाँ ही हितकारी होती हैं।

(४/११)।’

इसके अलावा इसमें भी कोई सन्देह नहीं कि आयुष चिकित्सा या आयुर्वेद प्रत्येक भारतीय के खून में व्याप्त है।

और तो और विश्व स्वास्थ्य संगठन भी कह रहा है कि एलोपैथ की एण्टीबायोटिक दवाओं से एण्टीमाइक्रोवियल रेजिस्टेंस (एएमआर) होता है जो दुनिया के शीर्ष १० सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरों में से एक माना जाता है। इस बैक्टेरियल ए.एम.आर. का २०१९ में १२.७ लाख वैश्विक मौतों से सीधा सम्बन्ध था व ४९.५ लाख मौतें पूरी तरह से दवा प्रतिरोधी संक्रमण से जुड़ी हैं। यह सब होते हुए भी और मोदी जी जैसा महान् राष्ट्रवादी प्रधानमंत्री जिन्होंने स्पष्ट कहा है कि मेरी गाड़ी आयुर्वेद और योग से चल रही है, जिन्होंने भारत के मुख्य न्यायाधीश तक को आयुर्वेद चिकित्सा से जोड़ा।

वहीं मोदी जी २३ सितम्बर २०१८ को झारखण्ड की राजधानी रांची से आयुष्मान् भारत जन आरोग्य योजना का शुभारम्भ कर निर्धनता रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाली बेचारी निरीह जनता को एलोपैथ के मकड़जाल में फेंक दिया, ऐसा क्यों? यह मोदी जी स्वयं जानें।

जबकि ‘आयुष्मान्’ रोगी की अवधारणा आयुर्वेद ऋषि सुश्रुत ने सूत्र ३४/२१ में की है। मोदी जी अच्छी तरह से जानते हैं कि आयुर्वेद या आयुष चिकित्सा ही ऐसी चिकित्सा है जो मानव को शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, सामाजिक, ऐंन्द्रिक रूप से स्वस्थ रखने और करने की बात करती है, हानिरहित चिकित्सा के सिद्धान्त बताती है। हमारा दावा है कि आयुर्वेद या आयुष को जन-जन तक पहुँचाकर केवल चिकित्सा ही नहीं की जा सकती है बल्कि रामराज्य की स्थापना भी की जा सकती है क्योंकि आयुर्वेद ही सम्यक् आहार, सम्यक् निद्रा, सम्यक् ब्रह्मचर्य को बताता है ‘प्रकृतिश्चारोग्यम्’ (चरक) कहकर समत्व को आरोग्य कहता है।

प्रत्यक्ष देखा जा सकता है कि जब देश में वैदिक परम्परा के चिकित्सक और वैदिक चिकित्सा रही तब का भारत कैसा था और ज्यों-ज्यों देश में एलोपैथी बढ़ी, अब का भारत कैसा है? नित नये रोगों की बाढ़।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने तो आदेश दे दिया और याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता, राष्ट्रवादी व्यक्तित्व, अश्विनी कुमार उपाध्याय का परिश्रम भी सार्थक हुआ किन्तु अब गेंद आयुष मंत्रालय के पाले में हैं। अच्छा अवसर है आयुष मंत्रालय के पास और आधार भी है न्यायालयादेश का आधार लेकर सकारात्मक आदेश पारित कर तत्काल लोककल्याण और आयुष उन्नति की भावना से भावित होते हुए आयुष को ‘आयुष्मान्’ योजना में शामिल करे। इससे जनता को तो लाभ मिलेगा ही उधर आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी (आयुष) चिकित्सकों की निश्चित् समृद्धि होगी, उनका महत्व बढ़ेगा, उन्हें काम मिलेगा, आगे बढ़ने का मार्ग मिलेगा, अपनी योग्यता और क्षमता प्रदर्शित करने का भरपूर अवसर मिलेगा।

आयुष चिकित्सकों को भी अब इस फैसले से उत्साहित होकर सकारात्मक सोच, चिंतन के साथ आगे आना चाहिए। अपने व्यक्तित्व को उभारना चाहिए और इस दिशा में कार्य कर रहे अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय का उत्साहवर्धन करना चाहिए और इस प्रकरण की आपस में चर्चा करनी चाहिए। अब समय आ गया है आयुष की समृद्धि का। क्योंकि न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी कह दिया है कि यदि भारत सरकार के निर्णय से याचिकाकर्ता असंतुष्ट है तो विधिवत् एक याचिका कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं। इससे स्पष्ट है कि जीत हमारी होगी, क्योंकि अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय जी इस संघर्ष को आर-पार करेंगे ही, हम उनके साथ हैं। चिकित्सा पल्लव का सम्पूर्ण पाठक जगत उनके साथ है। क्योंकि यह जन-जन के हित का मुद्दा है, सच में जनहित का मुद्दा है।

‘चिकित्सा पल्लव’ आज आयुष जगत की सर्वाधिक प्रसारित पत्रिका है। यह आयुष जगत में एक ऐसा उर्जित प्रवाह का प्रतीक है जिसके माध्यम से पिछले २५ सालों से आयुष चिकित्सा के उत्थान, जागरण, बोधन की पृष्ठभूमि तैयार होती आ रही है। इसे प्रत्येक आयुष चिकित्सक तक पहुँचाकर आयुष के उत्थान में सहभागिता करनी चाहिए।